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BREAKING: युवक को करंट देने का वीडियो वायरल, NHRC ने लिया संज्ञान
Shantanu Roy
11 July 2026 6:55 PM IST

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बड़ी खबर
Raisen. रायसेन। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि चोरी के आरोप में कुछ युवकों को कथित तौर पर बिजली का करंट देकर प्रताड़ित किया गया। वीडियो सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। हालांकि, वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है और प्रशासनिक जांच के बाद ही घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। वीडियो के वायरल होते ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी मामले का संज्ञान लिया है। आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि घटना की जानकारी मिलने के बाद आवश्यक निर्देश जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में कानून का शासन है और किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेकर किसी अन्य व्यक्ति को दंडित करने का अधिकार नहीं है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दावा किया गया है कि चोरी के आरोप में कुछ युवकों को कथित तौर पर बिजली का करंट देकर प्रताड़ित किया गया। वीडियो तेजी से विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया जा रहा है, जिसके बाद लोगों की ओर से इस घटना को लेकर कड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वीडियो कब का है, किन परिस्थितियों में बनाया गया और उसमें दिखाई गई घटना के पीछे वास्तविक तथ्य क्या हैं। प्रशासन की ओर से भी वीडियो की सत्यता और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है।
रायसेन,मध्यप्रदेश 📌
— प्रियंक कानूनगो Priyank Kanoongo (@KanoongoPriyank) July 11, 2026
चोरी के आरोप में युवकों को करंट लगाने की तालिबानी सज़ा देने का यह वीडियो असुद्दीन ओवैसी की पार्टी के नेता मुबिन ख़ान ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है ।
हम संज्ञान ले कर आवश्यक निर्देश दे रहे हैं।
यह भारत है यहाँ शरिया का या तालिबान का क़ानून नहीं चलेगा… pic.twitter.com/qjYs4grBx9
NHRC सदस्य ने कही बड़ी बात
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वायरल वीडियो का संज्ञान लिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति पर अपराध का आरोप है तो उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए, न कि उसे स्वयं दंडित किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत एक कानून आधारित लोकतांत्रिक देश है और किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। आयोग पूरे मामले की जानकारी जुटा रहा है और आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं।
प्रशासनिक जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
फिलहाल प्रशासन की ओर से पूरे मामले की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो की सत्यता, घटना का स्थान, संबंधित लोगों की पहचान और आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जा सकेगी। प्रशासन ने लोगों से भी अपील की है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी तरह की अपुष्ट जानकारी या अफवाहों पर विश्वास न करें और सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री साझा करने से बचें।
कानूनी प्रक्रिया पर जोर
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति पर चोरी या किसी अन्य अपराध का आरोप है तो उसके खिलाफ भारतीय कानून के तहत पुलिस और न्यायालय के माध्यम से कार्रवाई की जाती है। किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से प्रताड़ित करना या स्वयं दंड देना कानूनन अपराध की श्रेणी में आ सकता है। फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वायरल वीडियो में किए जा रहे दावे कितने सही हैं और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
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