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BREAKING: नॉर्वे ने PM मोदी को दिया सर्वोच्च सम्मान

Shantanu Roy
18 May 2026 7:32 PM IST
BREAKING: नॉर्वे ने PM मोदी को दिया सर्वोच्च सम्मान
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New Delhi. नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। यूरोपीय देश नॉर्वे ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया है। यह सम्मान पीएम मोदी को ओस्लो में 18 मई, सोमवार को प्रदान किया गया। इस उपलब्धि को भारत और नॉर्वे के बीच मजबूत होते संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।
यह सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिलने वाला 32वां बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मान बताया जा रहा है, जो वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव को दर्शाता है। नॉर्वे सरकार द्वारा दिया गया यह सम्मान दोनों देशों के बीच मित्रता, सहयोग और साझा विकास की प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है। सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने लिखा कि यह सम्मान उनके लिए गर्व का विषय है और इसे वह भारत की जनता को समर्पित करते हैं। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि यह सम्मान भारत और नॉर्वे के मजबूत संबंधों और वैश्विक प्रगति के लिए साझा प्रयासों को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों पांच देशों की महत्वपूर्ण विदेश यात्रा पर हैं। इस यात्रा की शुरुआत 15 मई को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से हुई थी। इसके बाद वे नीदरलैंड्स पहुंचे और फिर तीसरे चरण में भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन और द्विपक्षीय बैठकों के लिए नॉर्वे पहुंचे। यहां उनका भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया गया। नॉर्वे दौरे के बाद प्रधानमंत्री स्वीडन और फिर इटली का दौरा करेंगे। यह यात्रा भारत की विदेश नीति और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस यात्रा की एक खास बात यह भी है कि लगभग 43 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने नॉर्वे का दौरा किया है। इतने लंबे अंतराल के बाद इस उच्चस्तरीय यात्रा को लेकर नॉर्वे में रहने वाले भारतीय समुदाय में विशेष उत्साह देखा गया। प्रवासी भारतीयों ने प्रधानमंत्री के आगमन का स्वागत गर्मजोशी से किया और इसे दोनों देशों के संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत बताया। यह सम्मान और यह दौरा भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक स्थिति को और मजबूत करता है। साथ ही यह भी संकेत देता है कि आने वाले समय में भारत और यूरोपीय देशों के बीच सहयोग और भी गहरा होगा।
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