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परिजन सदमें में
Rae Bareli. रायबरेली। जिले के लालगंज कस्बे में रविवार की शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। फायर स्टेशन के निकट निर्माणाधीन भवन की तीसरी मंजिल पर काम कर रहे एक राजमिस्त्री और दो श्रमिक अचानक लिंटर गिरने से नीचे आ गिरे। हादसे में तीनों की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई और लोगों की भीड़ घटनास्थल पर उमड़ पड़ी।
हादसे का विवरण
दीपेमऊ गांव निवासी योगेश यादव के घर का निर्माण कार्य इन दिनों तेजी से चल रहा है। चार दिन पहले तीसरी मंजिल का लिंटर डाला गया था। रविवार की शाम भवन में छज्जे के लिंटर के बाहरी हिस्से का निर्माण कार्य किया जा रहा था। इस काम में बिंदा सिंह का पुरवा मजरे चचिहा गांव निवासी राजमिस्त्री रमेश प्रजापति उर्फ गुड्डू प्रजापति (45) पुत्र छंगालाल कार्यरत थे। उनके साथ चचिहा गांव निवासी मजदूर रामू (45) और ददरी निवासी रज्जब अली (45) मसाला तैयार करने का काम कर रहे थे। इसी बीच अचानक लिंटर का एक बड़ा हिस्सा दरक गया और गिर पड़ा। हादसे के वक्त तीनों मजदूर उसी हिस्से पर खड़े थे। भारी लिंटर के गिरने से वे 30 फीट की ऊंचाई से सीधे नीचे सड़क पर गिर गए। जोरदार धमाके के साथ हादसा हुआ, जिससे आसपास के लोग दहशत में आ गए।
इलाज के दौरान तीनों की मौत
हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत तीनों घायलों को स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लालगंज पहुंचाया। चिकित्सकों ने जांच के बाद राजमिस्त्री रमेश प्रजापति को मृत घोषित कर दिया। वहीं गंभीर रूप से घायल दोनों मजदूरों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान दोनों श्रमिकों—रामू और रज्जब अली—ने भी दम तोड़ दिया। इस तरह हादसे में तीनों की जान चली गई।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
हादसे की जानकारी मिलते ही क्षेत्राधिकारी (सीओ) गिरिजा शंकर त्रिपाठी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने मौके का निरीक्षण किया और मृतकों की पहचान सुनिश्चित की। सीओ ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला लिंटर की मजबूती और निर्माण कार्य की लापरवाही से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। पुलिस ने कहा कि पीड़ित परिवार की ओर से तहरीर मिलने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। घटना की जांच जारी है।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
हादसे की खबर मिलते ही मृतकों के परिजन घटनास्थल और अस्पताल पहुंचे। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में मातम का माहौल है। 45 वर्षीय रमेश प्रजापति उर्फ गुड्डू को परिवार का सहारा माना जाता था। मजदूर रामू और रज्जब अली भी अपने परिवारों की आजीविका का एकमात्र साधन थे। अचानक हुए इस हादसे ने तीनों परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया।
ग्रामीणों में गुस्सा और सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि भवन निर्माण में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। तीसरी मंजिल के लिंटर को बिना मजबूत सहारे और समय से पहले उपयोग में लाया गया। इसी कारण हादसा हुआ। लोगों का कहना है कि अगर निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता तो यह दर्दनाक हादसा नहीं होता। ग्रामीणों ने प्रशासन से भवन मालिक और ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने एक बार फिर से निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अक्सर देखा जाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे कस्बों में निर्माण कार्य बिना इंजीनियर की देखरेख और तकनीकी मानकों के किया जाता है। नतीजा यह होता है कि जरा सी लापरवाही बड़ी त्रासदी में बदल जाती है। रायबरेली हादसे ने साफ कर दिया है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता और सुरक्षा की अनदेखी मजदूरों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।
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