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BREAKING: जिला अस्पताल के डॉक्टर को 2 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार

Shantanu Roy
19 Aug 2025 7:30 PM IST
BREAKING: जिला अस्पताल के डॉक्टर को 2 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार
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जांच में किया बड़ा खुलासा
Jalore. जालोर। भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई की दिशा में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को बड़ी सफलता हाथ लगी है। जालोर जिले के राजकीय जिला चिकित्सालय में पदस्थ एक डॉक्टर को एसीबी टीम ने मंगलवार को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी डॉक्टर ने एक मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने के बदले में 2 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। जानकारी के अनुसार, मामला 24 जुलाई को दर्ज मारपीट के एक प्रकरण से जुड़ा हुआ है। पीड़ित व्यक्ति (परिवादी) को इस मामले में अपने चोटों का प्रतिवेदन (मेडिकल सर्टिफिकेट) चाहिए था, जिसके लिए उसने जालोर के राजकीय जिला चिकित्सालय के ट्रॉमा सेंटर में आवेदन किया था। इस मामले की जांच के लिए नियुक्त मेडिकल जूरिस्ट डॉ. कानाराम पटेल ने मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने के बदले 2 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की।
27 दिन तक सर्टिफिकेट रोका
आरोपी डॉक्टर ने परिवादी से बार-बार रिश्वत की मांग की और रुपये न देने पर मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने से इनकार कर दिया। इस वजह से परिवादी का सर्टिफिकेट 27 दिनों तक लंबित रहा। अंततः परेशान होकर परिवादी ने जालोर एसीबी कार्यालय से संपर्क किया और पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज करवाई।
एसीबी का सत्यापन और ट्रैप
शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने पहले सत्यापन किया। इस दौरान यह साफ हो गया कि आरोपी डॉक्टर वास्तव में 2 हजार रुपये की रिश्वत की मांग कर रहा है। इसके बाद एसीबी ने ट्रैप की योजना बनाई। मंगलवार शाम करीब 4 बजे परिवादी ने आरोपी डॉक्टर को तयशुदा रकम दी, तभी मौके पर मौजूद एसीबी टीम ने डॉक्टर को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई का नेतृत्व जालोर एसीबी के एएसपी मांगीलाल राठौड़ ने किया। टीम ने मौके से रिश्वत की राशि भी जब्त कर ली है। आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद उससे विस्तृत पूछताछ की जा रही है।
एसीबी अधिकारियों का बयान
एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) स्मिता श्रीवास्तव ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि परिवादी की शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा रिश्वत लेना गंभीर अपराध है और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम किया जा रहा है। एडीजी ने बताया कि आरोपी डॉक्टर पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि क्या डॉक्टर अन्य मामलों में भी इसी तरह रिश्वत लेता रहा है या नहीं।
अस्पताल प्रशासन पर सवाल
इस घटना के बाद जालोर जिला अस्पताल के कामकाज और व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। महज 2 हजार रुपये की रिश्वत के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट 27 दिनों तक रोककर रखना यह दर्शाता है कि मरीजों और परिवादियों को किस हद तक परेशान किया जाता है। यह मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली की भी जांच की मांग उठ रही है। राजस्थान में एसीबी लगातार भ्रष्टाचार के मामलों पर शिकंजा कस रही है। हाल ही में राज्यभर में कई रिश्वतखोरी के मामलों में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को रंगे हाथों पकड़ा गया है। जालोर का यह मामला भी इसी कड़ी का हिस्सा है, जो दिखाता है कि छोटी-सी राशि के लिए भी सरकारी सेवाओं में आम जनता को परेशान किया जाता है।
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