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ब्राजील: राष्ट्रपति चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को पहले दौर में झटका लगा है। 4 अक्टूबर को हुई वोटिंग में लूला पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो से पीछे रह गए। फ्लावियो को करीब 47% और लूला को लगभग 45% वोट मिले। किसी भी उम्मीदवार को 50% से ज्यादा वोट नहीं मिले, इसलिए अब 25 अक्टूबर को दूसरे दौर की वोटिंग होगी। इस चुनाव में बचे हुए उम्मीदवारों के वोट और मतदान से दूर रहे करीब 21% लोगों का रुख काफी अहम माना जा रहा है।
पहले दौर में फ्लावियो ने बनाई बढ़त
ब्राजील में राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता के वोट से होता है। राष्ट्रपति बनने के लिए किसी उम्मीदवार को 50% से ज्यादा वोट हासिल करना जरूरी है। 4 अक्टूबर को हुए पहले चरण में लूला और फ्लावियो के बीच सीधी टक्कर देखने को मिली। फ्लावियो बोल्सोनारो को करीब 47% वोट मिले, जबकि लूला को लगभग 45% वोट हासिल हुए। इस तरह फ्लावियो ने लूला से करीब 2% की बढ़त बनाई। खास बात यह है कि चुनाव से पहले सामने आए ज्यादातर सर्वे में लूला को बढ़त मिलती दिखाई गई थी। लेकिन वोटिंग के बाद आए नतीजों ने तस्वीर बदल दी। अब दोनों नेताओं के बीच मुकाबला दूसरे दौर में होगा।
बाकी उम्मीदवारों के वोट बन सकते हैं निर्णायक
पहले दौर में लूला और फ्लावियो के अलावा 10 अन्य उम्मीदवार भी मैदान में थे। अब ये सभी चुनाव से बाहर हो चुके हैं। हालांकि, उन्हें मिले वोट दूसरे दौर में काफी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इनमें रोनाल्डो काइआडो और रेनान सैंटोस के वोट खास माने जा रहे हैं। दोनों उम्मीदवारों को मिलाकर करीब 53 लाख वोट मिले हैं। फिलहाल दोनों ने यह साफ नहीं किया है कि वे दूसरे दौर में लूला का समर्थन करेंगे या फ्लावियो का। इसके अलावा पहले दौर में करीब 21% मतदाताओं ने वोट नहीं डाला। अब दूसरे दौर में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि इनमें से कितने लोग मतदान करने पहुंचते हैं और उनका झुकाव किस उम्मीदवार की तरफ रहता है।
पिता जेल में, बेटा राष्ट्रपति की दौड़ में
45 साल के फ्लावियो बोल्सोनारो ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। वह रियो डी जेनेरियो से सीनेटर हैं और 2002 से राजनीति में सक्रिय हैं। हालांकि राष्ट्रपति पद के लिए यह उनका पहला चुनाव है। जायर बोल्सोनारो 2022 का चुनाव हारने के बाद तख्तापलट की साजिश के मामले में करीब 27 साल की जेल की सजा पा चुके हैं। जेल में होने के कारण वह इस बार राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ सकते। ऐसे में उन्होंने अपने बेटे फ्लावियो को 2026 के चुनाव में आगे किया। फ्लावियो ने अपने पिता की दक्षिणपंथी राजनीतिक छवि को आगे बढ़ाते हुए अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई, टैक्स में कमी और कारोबार को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों को अपने चुनाव अभियान में प्रमुखता दी।
80 साल के लूला के सामने कई चुनौतियां
80 साल के लूला दा सिल्वा चौथी बार ब्राजील का राष्ट्रपति बनने की कोशिश कर रहे हैं। उनके चुनाव अभियान में गरीबों के लिए किए गए काम और सामाजिक कल्याण की योजनाएं प्रमुख मुद्दे हैं। वह जनता को अपनी सरकार के दौरान गरीब परिवारों को मिली राहत और योजनाओं की याद दिला रहे हैं। हालांकि, इस बार उनके सामने कई चुनौतियां भी हैं। महंगाई और रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती कीमतें लोगों के लिए चिंता का विषय हैं। इसके अलावा अपराध भी चुनाव का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। विपक्ष इन्हीं मुद्दों को लेकर लूला सरकार को घेर रहा है।
संसद में भी बोल्सोनारो खेमे की मजबूत मौजूदगी
राष्ट्रपति चुनाव के साथ ब्राजील में संसद के लिए भी चुनाव हुए। इसमें जायर बोल्सोनारो के समर्थक दक्षिणपंथी दलों को अच्छी पकड़ मिली है। फ्लावियो बोल्सोनारो की लिबरल पार्टी निचले सदन में सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पार्टियों में आगे रही। बोल्सोनारो परिवार के अन्य सदस्य भी चुनाव में सफल रहे। जायर बोल्सोनारो की पत्नी मिशेल बोल्सोनारो सीनेट पहुंच गई हैं, जबकि उनके बेटे कार्लोस बोल्सोनारो ने भी चुनाव जीत लिया है। इसका मतलब यह है कि अगर लूला दोबारा राष्ट्रपति बनते हैं, तब भी संसद में बोल्सोनारो समर्थक सांसदों की बड़ी मौजूदगी उनके लिए चुनौती बन सकती है।
अमेरिका और चीन की भी नजर
ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और BRICS का संस्थापक सदस्य भी है। इसलिए इस चुनाव का असर केवल ब्राजील की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं माना जा रहा। लूला की सरकार चीन और BRICS देशों के साथ रिश्तों को मजबूत करने पर जोर देती रही है। वहीं फ्लावियो बोल्सोनारो को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के करीब माना जाता है। ऐसे में चुनाव का नतीजा ब्राजील के अमेरिका, चीन और BRICS देशों के साथ रिश्तों की दिशा पर भी असर डाल सकता है।
अब 25 अक्टूबर को होने वाला दूसरा दौर तय करेगा कि ब्राजील की सत्ता लूला के पास रहती है या बोल्सोनारो परिवार की राजनीतिक वापसी होती है।
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