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किताबें ही किताबें – मनोहर कहानियों का अनोखा संकलन, निशिकांत दुबे:

SHIDDHANT
5 Feb 2026 10:29 PM IST
किताबें ही किताबें – मनोहर कहानियों का अनोखा संकलन, निशिकांत दुबे:
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Delhi दिल्ली: बजट सत्र के दौरान लोकसभा में अचानक माहौल गरम हो गया, जब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने हाथों में किताबों का ढेर लेकर नेहरू-गांधी परिवार पर सवाल उठाए। उन्होंने जिन किताबों का हवाला दिया, उनमें देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और नेहरू-गांधी परिवार के निजी, राजनीतिक और ऐतिहासिक पहलुओं का उल्लेख है। जैसे ही दुबे ने किताबों के अंश पढ़ना शुरू किया, विपक्षी सांसदों ने कड़ा विरोध जताया और कहा कि संसद में इस तरह की आपत्तिजनक भाषा का उपयोग नियमों के खिलाफ है। इस हंगामे के कारण कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।
सबसे चर्चित किताब “एडविना एंड नेहरू” है, जिसमें एडविना माउंटबेटन और नेहरू के बीच गहरे बौद्धिक और भावनात्मक संबंध का जिक्र है। हालांकि लेखक पामेला हिक्स ने शारीरिक संबंध की अटकलों से इनकार किया है। दूसरी किताब “Reminiscences of the Nehru Age” में नेहरू युग की अंदरूनी राजनीति और प्रशासनिक कामकाज का विवरण है, जिसमें इंदिरा गांधी की शुरुआती भूमिका और नेहरू के करीबी नेताओं का भी जिक्र है।
तीसरी किताब “The Red Sari” सोनिया गांधी के जीवन पर आधारित काल्पनिक जीवनी है, जिसे लेकर
कांग्रेस
का कहना है कि इसमें कई घटनाओं का गलत और नाटकीय चित्रण किया गया है। चौथी किताब “इंदिरा – द लाइफ ऑफ इंदिरा नेहरू गांधी” इंदिरा गांधी के निजी और राजनीतिक जीवन पर केंद्रित है। इसमें योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी के सत्ता में प्रभाव और उनके निजी संबंधों का जिक्र विवादित माना गया।
पांचवीं किताब “From Reveille to Retreat” में भारत-चीन 1962 युद्ध से पहले की सैन्य तैयारियों और नेहरू सरकार की नीतियों पर प्रकाश डाला गया है। किताब में चीन के प्रति नेहरू की रणनीतिक सोच और सीमा सुरक्षा में चूक का विश्लेषण शामिल है। निशिकांत दुबे का कहना था कि इन पुस्तकों में नेहरू-गांधी परिवार की राजनीतिक और निजी गतिविधियों पर कई तथ्य हैं, जिन्हें जनता तक पहुंचाना जरूरी है। इस कार्रवाई से संसद में किताबों को लेकर सियासी और ऐतिहासिक बहस तेज हो गई है।
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