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तपोवन बराज के रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ा पत्थर हटाने के लिए किया गया ब्लास्ट, देखें VIDEO

Admin2
23 Feb 2021 5:33 PM GMT
तपोवन बराज के रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ा पत्थर हटाने के लिए किया गया ब्लास्ट, देखें VIDEO
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ANI 

तपोवन बराज के पास जिस जगह सबसे ज्यादा मजदूरों के दबे होने की आशंका थी, वहां पर रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक ब्लास्ट किया गया दरअसल एक बड़ा पत्थर वहां आ गया था. पत्थर को हटाना मुश्किल हो रही थी, इस लिए बराज की साइट पर ब्लास्ट किया गया. साथ ही इस पत्थर से इलाके में नदी के प्रवाह भी रुक रहा था. नदी का प्रवाह ठीक करने के लिए इस पत्थर को हटाना जरूरी था.

बचाव कर्मी सुरंग के अंदर और रैणी गांव में ऋषिगंगा प्रोजेक्ट के पास लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं. त्रासदी के बाद सेना और आईटीबीपी के जवान भी कई दिनों में बचाव कार्य में जुटे रहे. एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें अब भी बचाव कार्य कर रही हैं. एनडीआरएफ का कहना है कि आपदा के बाद से तपोवन सुरंग और बैराज साइट से मलबा हटाने का कार्य जारी है. हालांकि बार-बार सुरंग में हो रहा पानी का रिसाव बचाव कार्य में बाधा पैदा कर रहा है. वहीं एनडीआरएफ का कहना है कि सुरंग में 171 मीटर तक खोदाई हो चुकी है.

204 लोग हुए थे लापता
सात फरवरी को चमोली जिले में सुबह करीब 9.30 बजे ऋषिगंगा नदी में सैलाब आया था. जिससे रैंणी गांव के पास स्थित ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट और तपोवन में एनटीपीसी का एक निर्माणधीन पावर प्रोजेक्ट पूरी तरह तबाह हो गया था. 7 फरवरी को ग्लेशियर टूटने की वजह से आई आपदा में करीब 204 लोग लापता हो गए थे. आपदा में अबतक 68 शव और 28 मानव अंग बरामद हो चुके हैं, 136 लोग अभी भी लापता हैं. उनकी तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.
इसी के साथ सोमवार को चमोली आपदा में लापता हुए लोगों को मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए केंद्र सरकार अनुमति दे दी. उत्तराखंड सरकार ने भी इसको लेकर अधिसूचना जारी कर दी है. इससे लापता लोगों के परिजनों को मुआवजा मिलने में आसानी होगी. प्रमाण पत्र तीन श्रेणियों में जारी होंगे. पहली श्रेणी उत्तराखंड निवासियों की है, दूसरी राज्य से बाहर के लोगों और तीसरी पर्यटक श्रेणी है.
लापता लोगों को जारी किया जाएगा मृत्यु प्रमाण पत्र
पहली श्रेणी में आपदा प्रभावित स्थानों के स्थायी निवासी हैं या फिर आपदा प्रभावित स्थान के निकटवर्ती स्थानों के स्थानीय निवासी हैं, जो आपदा के समय आपदा प्रभावित स्थानों में मौजूद थे. दूसरी की तहत उत्तराखंड के अन्य जिलों के निवासी, जो आपदा के समय आपदा प्रभावित स्थानों पर उपस्थित थे. तीसरी श्रेणी में अन्य राज्यों के पर्यटक या व्यक्ति, जो आपदा के समय आपदा प्रभावित स्थानों पर मौजूद थे.
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