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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नए महाभियोग प्रस्ताव पर बड़ा अपडेट

SHIDDHANT
22 Oct 2026 10:29 PM IST
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नए महाभियोग प्रस्ताव पर बड़ा अपडेट
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दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नया महाभियोग प्रस्ताव लाने की चर्चाओं के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का नया प्रस्ताव उनके सामने आता है, तो उस पर संसदीय नियमों और निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार विचार किया जाएगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
नए प्रस्ताव पर क्या बोले ओम बिरला?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संभावित नए प्रस्ताव के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि प्रस्ताव सामने आने पर उसे देखा जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि नया प्रस्ताव औपचारिक रूप से जमा किया गया है या नहीं। उन्होंने इसकी स्वीकार्यता या संभावित परिणाम को लेकर भी कोई टिप्पणी नहीं की।
पहले खारिज हो चुका है प्रस्ताव
इससे पहले 12 मार्च 2026 को विपक्ष के 130 लोकसभा सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए प्रस्ताव का नोटिस दिया था। विपक्ष ने उन पर चुनावी प्रक्रिया में कथित पक्षपात और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मामलों में अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। हालांकि, अप्रैल 2026 में लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति ने संबंधित नोटिस स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। लोकसभा सचिवालय ने इस संबंध में आधिकारिक सूचना भी जारी की थी।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की क्या है प्रक्रिया?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी प्रक्रिया और आधार पर पद से हटाया जा सकता है, जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए निर्धारित हैं। इस प्रक्रिया में लोकसभा के कम से कम 100 या राज्यसभा के 50 सांसदों के हस्ताक्षर वाला नोटिस आवश्यक होता है। प्रस्ताव स्वीकार होने पर आरोपों की जांच की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। पद से हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में निर्धारित विशेष बहुमत जरूरी है।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर जारी विवाद
विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि आयोग के कुछ निर्णयों से चुनावी निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, ये आरोप हैं और इनसे किसी संवैधानिक कदाचार की पुष्टि नहीं होती।
अब नए प्रस्ताव की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही यह तय होगा कि आगे कौन-सी संसदीय प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
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