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न्यूज़ क्रेडिट: आजतक
मामूली अपराधों में जेल में बंद ऐसे आरोपियों को रिहा करने का आदेश दिया है.
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद कैदियों की रिहाई को लेकर मंगलवार को बड़ा कदम उठाया. सुप्रीम कोर्ट ने मामूली अपराधों में जेल में बंद ऐसे आरोपियों को रिहा करने का आदेश दिया है, जो जमानत की शर्तें पूरी न कर पाने की वजह से जेल में ही बंद हैं. दरअसल संविधान दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मामूली अपराधों में वर्षों से कैद आरोपियों द्वारा जमानत की शर्तें पूरी न कर पाने वालों को जेल से रिहाई का जिक्र किया था.
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि जमानत की शर्त पूरा करने में असमर्थ होने की वजह से वर्षों से जेल में बंद विचाराधीन कैदियों को रिहा करने का आदेश दिया है. जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि राज्य ऐसे कैदियों का डेटा 15 दिन में एक चार्ट के रूप में दे. साथ ही NALSA (नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी) को कहा कि वो लीगत समेत सभी सहायता प्रदान करेगा.
कोर्ट ने कहा कि सभी जेल ऐसे विचाराधीन कैदियों की सूची विस्तृत जानकारी के साथ एक सारणी के रूप में राज्य सरकार और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के पास भेजेंगे. राज्य सरकार और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण आपस में बातचीत कर समुचित नीति बनाएंगे.
कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि वो राज्यों से एक निश्चित प्रारूप में सारणी मंगवाएं. सारणी में आरोपी कैदी का नाम, अपराध का आरोप, जमानत पर रिहा करने के आदेश की तारीख, शर्तें जो पूरी करने में आरोपी असमर्थ रहा, तब से अब तक कितनी अवधि बीत गई आदि चीजें जरूर होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने सजायाफ्ता कैदियों के लिए भी सजा अवधि पूरी होने से पहले रिहाई की संभावनाएं और शर्तें तैयार करने का भी निर्देश दिया है.
आदेश में कहा गया कि आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान भी सजा की अवधि पूरी होने से पहले रिहाई की योजना शुरू की गई थी, लेकिन उस पर अमल पूरी तरह से कारगर नहीं हुआ. अब राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और केंद्रीय गृह मंत्रालय कैदियों की सजा अवधि पूरी होने से पहले रिहाई की संभावनाओं पर विचार कर उसे भी इस योजना में शामिल करें.
jantaserishta.com
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