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2000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर शुल्क विवाद
नई दिल्ली: यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) से जुड़े नए चार्ज को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई होने वाली है। ₹2000 से अधिक के कुछ UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर अदालत सुनवाई करेगी।
UPI चार्ज को लेकर व्यापारियों और डिजिटल भुगतान से जुड़े लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कुछ व्यक्ति से व्यापारी (Person-to-Merchant) UPI लेनदेन पर ₹2000 से अधिक की राशि के लिए MDR लागू किए जाने की बात कही गई है। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।
याचिका में नए शुल्क ढांचे को चुनौती दी गई है। इसमें व्यवस्था की वैधता और इसे लागू करने की प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान इस मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हो सकती है। UPI भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुका है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबार तक बड़ी संख्या में लोग QR कोड और ऑनलाइन भुगतान का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में UPI पर किसी भी तरह के शुल्क को लेकर आम लोगों और व्यापारियों की नजर इस सुनवाई पर टिकी हुई है।
UPI चार्ज को लेकर यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रस्तावित MDR सीधे ग्राहकों से वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है, बल्कि यह व्यापारी लेनदेन से जुड़ी व्यवस्था है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, सामान्य ग्राहकों के व्यक्तिगत UPI भुगतान पर इसका सीधा असर नहीं पड़ने की बात कही गई है। व्यापारी संगठनों के कुछ वर्गों ने इस व्यवस्था पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत का असर छोटे कारोबारियों पर पड़ सकता है। वहीं, शुल्क व्यवस्था के समर्थकों का तर्क है कि इससे डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि ₹2000 से अधिक के UPI लेनदेन पर लागू होने वाले नियम को लेकर आगे क्या स्थिति बनती है। फिलहाल डिजिटल भुगतान करने वाले करोड़ों यूजर्स और व्यापारी इस मामले की सुनवाई पर नजर बनाए हुए हैं।
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