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छत्तीसगढ़ के बुजुर्ग का बड़ा दिल: भीख मांगकर जोड़ा पैसा, अब जरूरतमंदों को भोजन खिलाने के लिए कर दिया दान

jantaserishta.com
5 March 2022 5:53 PM IST
छत्तीसगढ़ के बुजुर्ग का बड़ा दिल: भीख मांगकर जोड़ा पैसा, अब जरूरतमंदों को भोजन खिलाने के लिए कर दिया दान
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अपनी कमाई का कुछ हिस्सा दान करने वाले लोगों की इस दुनिया में कमी नहीं है, लेकिन दुर्ग के एक बुजुर्ग के बारे में क्या कहेंगे, जो भीख मांगने से मिलने वाले पैसों को पिछले कई दिनों से इकठ्ठा करके जिस संस्था का निःशुल्क भोजन वह विगत 1 वर्ष से खा रहा था उस संस्था को आज रात्रि भोजन सेवा में आकर दान कर दिया...

दुर्ग: विगत 5 वर्षों से प्रतिदिन लगभग 100 से अधिक जरूरतमंदों को निशुल्क भोजन वितरण करने वाली जन समर्पण सेवा संस्था, दुर्ग जोकि प्रतिदिन दुर्ग रेलवे स्टेशन एवं शहर के अन्य स्थानों में जाकर फुटपात में रहने वाले हर जरूरतमंदों तक निशुल्क भोजन एवं जरूरत की सामग्री वितरण कर रही है.

जन समर्पण सेवा संस्था के अध्यक्ष योगेन्द्र शर्मा बंटी ने बताया कि प्रतिदिन की तरह कल दिनाँक 3 मार्च को संस्था के सभी सदस्य जरूरतमंदों को भोजन खिलाने दुर्ग स्टेशन पहुँचे में पहुँचे जहाँ जरूरतमंद विकलाँग, बुजुर्ग एवं महिला भोजन के इंतजार में बैठे हुए थे, उन जरूरतमंदों में एक बुजुर्ग जो कि विगत 1 वर्ष से प्रतिदिन भोजन खाता है, उसको देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा सकता था कि मानवता की सेवा करने में इस शख्स ने दुनिया के बड़े-बड़े रईसों को पीछे छोड़ दिया है.
दुबला पतला शरीर, पैर से विकलांग, गूंगा, भैरा, सफेद उलझी दाढ़ी, माथे पर तिलक, सफेद कुर्ता, धोती पहने यह बुजुर्ग जब सब जरूरतमंद भोजन कर लिए वह बुजुर्ग खुद भी प्रतिदिन की तरह भोजन कर लिया तब उसमें अपने पास रखे सभी थैले को निकाला और उस अलग अलग थैले में रखे चिल्हर एवं नोट को निकाला और इशारों में संस्था के अध्यक्ष बंटी शर्मा को बुलाया और चिल्हर गिनने बोला, गिनने के पश्चात वह वो सब चिल्हर एवं रुपये को रखने बोल दिया और इशारों इशारों में सभी जरूरतमंदों को उस रुपये से एक दिन खाना खिलाने बोल दिया बाबा जी द्वारा संस्था को कुल 511 रुपये दान दिए गए है जिसमें कुछ नोट, एवं 10, 5, 2, 1 के सिक्के है.
संस्था के राजेन्द्र ताम्रकार ने बताया कि यह बुजुर्ग लगभग 1 वर्ष पहले दुर्ग रेलवे स्टेशन के फुटपात में रहने आये है, और प्रतिदिन रात्रि में संस्था द्वारा वितरित किया जाने वाला भोजन खाते है, प्रतिदिन सुबह से रात्रि तक इधर उधर घूमकर रात्रि में स्टेशन में आ जाते है, इस दौरान वे लोगों से कुछ पैसा मांगते है और उसे बड़े जतन से सहेज लेते हैं. रात होने पर संस्था का भोजन खाकर स्टेशन के बाहर सो जाते है, और सुबह लोगों से मिला खाना खाकर पेट भर लेते हैं. पैसा कमाने के लिए तमाम बुरे तरीके अपनाने वाले लोगों को पांडियां से सबक लेना चाहिए जो भले भीख मांगकर पैसा कमाते हैं, लेकिन उसे खुद पर खर्च नहीं करते. जो दे सकते हैं उनसे लेकर उन लोगों को देते हैं, जिन्हें उसकी ज्यादा जरूरत है. यह बात दीगर है कि उन्होंने कभी यह नहीं सोचा कि उन्हें खुद भी इस पैसे की जरूरत है.
संस्था के शिशु शुक्ला ने बताया कि कुछ दिन पूर्व ये बुजुर्ग बाबा जो कि कुछ बोल या सुन नही सकते वे इशारों में संस्था के सदस्यों से पूछा था कि सभी जरूरतमंदों को एक दिन का खाना खिलाने में कितना रुपये लगता है तब संस्था के सदस्यों ने उन्हें इशारों में बताया था कि लगभग 500 रुपये खर्च आते है, उसके बाद वह प्रतिदिन रोज चुप चाप खाना खाते और चल देते थे, दिनाँक 3 मार्च को वे अपने साथ अपना वह रुपये भी साथ लाये जिसको उन्होंने बहुत दिनों में एकत्रित किया था, और वह रूपए को बुजुर्ग बाबा ने संस्था के अध्यक्ष बंटी शर्मा को दे दिए.
संस्था के सदस्य आशीष मेश्राम ने बताया कि यह बाबा मुह से न कुछ बोल सकते और न कुछ कान से सुन सकते प्रतिदिन भोजन करने वाले बुजुर्गों की कतार में सबसे आगे इनको बैठाकर भोजन खिलाया जाता है और पूर्व में समय समय पर इस बुजुर्ग बाबा का स्वास्थ्य ठीक नही रहने पर इनको डाँ की सलाह से दवाई भी संस्था के सदस्य लाकर देते है, जब ये दुर्ग स्टेशन आये थे तब इनको पैर में चलने के लिए बहुत तकलीफ थी जिसको देखकर संस्था द्वारा इनको बैसाखी दिए और समय समय और जरूरत की हर समाग्री साबुन, निरमा, तेल आदि देते है.
बुजुर्ग बाबा जब अपने थैले से रुपये निकालकर संस्था के सदस्यों को दिए और हाथ से इशारा करके बोले कि एक दिन सभी जरूरतमंदों को मेरी तरफ से खाना खिलाना, तब संस्था के सभी सदस्यों की आखों से आशु आ गया सभी की आँख छलक पड़ी सोचा नही था किसी ने की ऐसा दानी भी देखने को मिलेगा, संस्था के सदस्य बाबा से रुपये नही ले रहे थे क्योकि संस्था का यह कार्य जन सहयोग से बिना रुके प्रतिदिन जारी है, परन्तु जब बाबा ने हाथ जोड़ लिया तो सभी उनका पैर पढ़कर वो रुपये को लिए और उस रुपए से एक दिन सभी जरूरतमंदों को भोजन खिलाने के वादा किये, संस्था के सदस्यों ने अपनी 5 साल की सेवा में यह सेवा एवं दान को सबसे बड़ी पूजीं कहा और जीवन मे सदैव इस ऐतिहासिक दिन एवं पल को सजो के रखने की बात कही.
इस दानवीर बुजुर्ग बाबा ने ऐसा दान देकर आज बता दिया कि आज भी इंसानियत जिंदा है, और लोगों की मदद करना, भूखे को भोजन खिलाना ही जीवन का सबसे बड़ा कार्य है, जिसके सामने रुपए-पैसा, धन-दौलत भी कुछ नही है.
भोजन सेवा में प्रतिदिन की तरह संस्था के अध्यक्ष योगेन्द्र शर्मा बंटी, शिशु शुक्ला, अर्जित शुक्ला, आशीष मेश्राम, प्रकाश कश्यप, संजय सेन, राजेन्द्र ताम्रकार, शुभम सेन, हरीश ढीमर, दद्दू ढीमर, मृदुल गुप्ता, अख्तर खान, शमीर खान, शब्बीर खान, भागवत पटेल, छोटू, सुजल शर्मा, ईशु खान, एवम अन्य सदस्य उपस्थित थे.




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