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BIG BREAKING: ज़ेलेंस्की दावोस पहुंचे, कुछ देर में ट्रंप से मिलेंगे

Shantanu Roy
22 Jan 2026 6:45 PM IST
BIG BREAKING: ज़ेलेंस्की दावोस पहुंचे, कुछ देर में ट्रंप से मिलेंगे
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New Delhi. नई दिल्ली। ज़ेलेंस्की दावोस पहुंच गए हैं और ट्रंप से मिलने वाले हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व आर्थिक मंच (WEF) की 56वीं सालाना बैठक में यूक्रेन-रूस युद्ध को लेकर बड़ा और विवादित बयान दिया है। स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित इस वैश्विक मंच से ट्रंप ने दावा किया कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध अब समाप्त होने के बेहद करीब है और दोनों देश किसी समझौते (डील) की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बातचीत काफी हद तक आगे बढ़ चुकी है और अगर अब भी समझौता नहीं होता, तो इसके लिए दोनों देशों के नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। ट्रंप ने अपने बयान में तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा, “अगर यह डील नहीं होती है तो दोनों लीडर स्टूपिड हैं।


मैं ऐसा कहना नहीं चाहता, लेकिन सच यही है।” उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है। गौरतलब है कि यूक्रेन-रूस युद्ध अपने चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है, जिसमें लाखों लोग प्रभावित हुए हैं, हजारों की जान गई है और बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। दावोस में मौजूद वैश्विक नेताओं, उद्योगपतियों और नीति-निर्माताओं के सामने ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में आठ से ज्यादा बड़े युद्ध और संघर्ष सुलझाए हैं। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा, “यह युद्ध तो मेरे लिए आसान होना चाहिए था, लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच इतनी गहरी नफरत है कि मामला उलझता चला गया।” हालांकि इसके बावजूद ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देश अब युद्ध से थक चुके हैं और समझौता करना चाहते हैं।

ट्रंप ने दावा किया कि रूस भी डील चाहता है और यूक्रेन भी किसी समाधान के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “हम कोशिश कर रहे हैं और सच कहूं तो हम काफी करीब पहुंच चुके हैं।” उनके इस बयान को संभावित शांति वार्ता की दिशा में एक अहम संकेत माना जा रहा है, हालांकि अभी तक किसी ठोस समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने नाटो और यूरोपीय देशों पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध असल में यूरोप की समस्या है, अमेरिका की नहीं। ट्रंप ने कहा, “अमेरिका बहुत दूर है। हमारे और यूरोप के बीच एक बड़ा समंदर है। यह युद्ध यूरोप के दरवाजे पर हो रहा है, फिर भी सबसे ज्यादा बोझ अमेरिका उठा रहा है।” उन्होंने सवाल उठाया कि अमेरिका को इस युद्ध से आखिर मिला क्या।

ट्रंप बोले, “हमें सिर्फ मौत, तबाही और अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है। वो भी ऐसे लोगों पर खर्च किए गए पैसे, जो हमारी कद्र तक नहीं करते।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यूरोपीय देश अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहे और सुरक्षा के नाम पर अमेरिका पर निर्भर हैं। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका में भी यूक्रेन को दी जा रही आर्थिक और सैन्य मदद को लेकर बहस तेज होती जा रही है। कई अमेरिकी सांसद और नागरिक यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर अमेरिका को इस युद्ध में कब तक पैसा और
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झोंकते रहना होगा। दावोस में ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप एक बार फिर खुद को “डील मेकर” के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि इस तरह की भाषा कूटनीति के लिए नुकसानदेह हो सकती है। फिलहाल ट्रंप के दावे ने यूक्रेन-रूस युद्ध को लेकर वैश्विक चर्चा को एक बार फिर तेज कर दिया है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि क्या वास्तव में दोनों देश किसी शांति समझौते के करीब हैं या यह बयान सिर्फ राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है।
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