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BIG BREAKING: अमेरिकी H-1B वीजा फीस विवाद: भारतीय आईटी पेशेवरों को मिली राहत

Shantanu Roy
20 Sept 2025 10:26 PM IST
BIG BREAKING: अमेरिकी H-1B वीजा फीस विवाद: भारतीय आईटी पेशेवरों को मिली राहत
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बड़ी खबर
New Delhi/Washington. नई दिल्ली / वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B वीजा की सालाना फीस 1 लाख डॉलर करने की घोषणा के बाद भारतीय आईटी पेशेवरों और कंपनियों में अफरातफरी मच गई थी। इसके बाद कई दिग्गज टेक कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को तुरंत अमेरिका लौटने की सलाह तक दे दी थी। लेकिन अब अमेरिकी अधिकारियों की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि भारतीयों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है और यह नया नियम केवल नए H-1B वीजा आवेदन पर लागू होगा।

अमेरिकी अधिकारी की सफाई
शनिवार को अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि H-1B वीजा पर पहले से रह रहे भारतीयों को अमेरिका लौटने या दोबारा 1 लाख डॉलर देने की जरूरत नहीं है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों के पास पहले से H-1B वीजा है या जो अपने वीजा का रिन्यूवल करवा रहे हैं, उन पर नई फीस लागू नहीं होगी। इस घोषणा से भारतीय पेशेवरों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिली। उन्होंने कहा कि नया नियम केवल नए आवेदनकर्ताओं के लिए है और पहले से अमेरिका में कार्यरत कर्मचारियों को इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा।


भारतीय पेशेवरों पर सबसे ज्यादा असर
H-1B वीजा धारकों में करीब 70% भारतीय आईटी पेशेवर हैं। यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन के प्रस्तावित बदलाव ने भारत में टेक कंपनियों और कर्मचारियों के बीच उत्पात मचा दिया। अगर नई फीस लागू हो जाती, तो भारत से अमेरिका जाने वाले आईटी पेशेवरों की संख्या पर नकारात्मक असर पड़ सकता था।

कंपनियों में चिंता, अब थोड़ी राहत
माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और जेपी मॉर्गन जैसी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को तत्काल अमेरिका लौटने की चेतावनी दी थी। कंपनियों ने निर्देश दिए थे कि जो कर्मचारी अमेरिका के बाहर हैं, उन्हें तुरंत लौट जाना चाहिए। वहीं, अमेरिका में रहने वाले कर्मचारियों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा से बचने की सलाह दी गई थी। लेकिन अमेरिकी अधिकारी की सफाई से अब कंपनियों और कर्मचारियों को थोड़ी राहत मिली है। कंपनियों ने कहा कि इस तरह के नियम केवल नए वीजा धारकों के लिए लागू होंगे और वर्तमान कर्मचारियों के लिए यह प्रभावी नहीं होगा।

H-1B वीजा फीस का वर्तमान और नया ढांचा
फिलहाल H-1B वीजा की फीस 2,000 से 5,000 डॉलर के बीच होती है। नई नीति लागू होने पर यह फीस सालाना 1 लाख डॉलर हो जाएगी। इससे टेक कंपनियों पर और भारत से अमेरिका जाने वाले कर्मचारियों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ता।

टेक कंपनियों की प्रतिक्रिया
माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और जेपी मॉर्गन ने हाइप के बीच कर्मचारियों को सलाह दी कि वे अपने वीजा और यात्रा की स्थिति पर ध्यान दें। हालांकि, अधिकारी की सफाई के बाद कंपनियों ने अब कर्मचारियों को घबराने की जरूरत नहीं होने की जानकारी दी है। भारतीय आईटी पेशेवरों और उनके परिवारों ने अमेरिकी अधिकारी की सफाई के बाद राहत की सांस ली है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भारतीय टेक इंडस्ट्री और H-1B वीजा धारकों के लिए सकारात्मक संकेत है।
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