भारत

BIG BREAKING: नेपाल में सुशीला कार्की की शपथ 20 मिनट टली, अंतरिम सरकार गठन पर विवाद

Shantanu Roy
12 Sept 2025 9:33 PM IST
BIG BREAKING: नेपाल में सुशीला कार्की की शपथ 20 मिनट टली, अंतरिम सरकार गठन पर विवाद
x
बड़ी खबर
New Delhi/Kathmandu. नई दिल्ली/काठमांडू। नेपाल में राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। सुशीला कार्की के अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में शपथ ग्रहण का कार्यक्रम करीब 20 मिनट के लिए टाल दिया गया है। राष्ट्रपति के मीडिया सलाहकार किरण पोखरेल ने बताया कि कुछ तकनीकी कारणों के चलते समारोह का समय आगे बढ़ाया गया है। वहीं, मंत्रिमंडल गठन को लेकर चर्चा लगातार जारी है। सूत्रों के अनुसार, कानून मंत्री के रूप में ओमप्रकाश अर्याल का नाम लगभग तय माना जा रहा है। राष्ट्रपति भवन में चल रही उच्चस्तरीय बैठकों में अर्याल को सुशीला कार्की के साथ ही शपथ दिलाने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा कुलमान घीसिंग को भी शीतल निवास बुलाकर उनसे मंत्रिमंडल में शामिल होने को लेकर बातचीत की गई है। उन्हें ऊर्जा मंत्रालय सौंपे जाने की संभावना जताई जा रही है।
सुशीला कार्की को नेपाल की संविधान की धारा 61 के तहत अंतरिम सरकार का प्रमुख नियुक्त किया गया है। सामान्य परिस्थितियों में सरकार गठन संविधान की धारा 76 के अनुसार होता है, जिसमें प्रधानमंत्री के लिए संसद सदस्य होना और बहुमत साबित करना आवश्यक शर्तें होती हैं। लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति में संसद भंग किए जाने के बाद धारा 76 लागू नहीं हो पा रही है। इसलिए धारा 61 के आधार पर राष्ट्रपति ने अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग कर कार्की को अंतरिम सरकार का नेतृत्व सौंपा है।
संविधान की धारा 61 राष्ट्रपति के कार्यों, कर्तव्यों और अधिकारों का विवरण देती है। उपधारा 2 के अनुसार राष्ट्रपति अपने दायित्वों का पालन करेंगे, जबकि उपधारा 4 संविधान की रक्षा और पालन सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपती है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि संसद भंग होने के बाद संवैधानिक संकट उत्पन्न हुआ, जिसके समाधान के लिए यह कदम उठाया गया है।
इसके साथ ही नेपाल में राजनीतिक विरोध शुरू हो गया है। विभिन्न दलों ने संसद भंग करने के
राष्ट्रपति
के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण, असंवैधानिक और लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया है। ओली की पार्टी के महासचिव शंकर पोखरेल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह फैसला पूरी तरह अस्वीकार्य है और इसे तत्काल रोका जाना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की है कि वे इस निर्णय के खिलाफ शांतिपूर्ण लेकिन संगठित प्रदर्शन करें ताकि लोकतंत्र की रक्षा की जा सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम न सिर्फ संविधान की व्याख्या पर बहस पैदा करेगा, बल्कि नेपाल में सत्ता संतुलन को लेकर गंभीर संकट भी उत्पन्न कर सकता है। विपक्षी दलों ने इसे सत्ता केंद्रीकरण का प्रयास बताया है, जबकि सरकार समर्थकों का तर्क है कि संवैधानिक संकट से निपटने के लिए यह आवश्यक कदम है।
जनता में भी इस घटनाक्रम को लेकर असमंजस और चिंता का माहौल है। व्यापारियों और आम नागरिकों का मानना है कि राजनीतिक अस्थिरता से आर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित हो सकती हैं। वहीं संविधान विशेषज्ञों ने कहा है कि धारा 61 का प्रयोग सीमित परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए और इसे लोकतांत्रिक परंपराओं से संतुलित करना जरूरी है।
फिलहाल शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। यह देखा जाना बाकी है कि आगामी दिनों में नेपाल की राजनीति किस दिशा में जाती है और क्या विपक्षी दल राष्ट्रपति के फैसले को चुनौती देंगे। लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा और संविधान की मर्यादा बनाए रखने के लिए सभी पक्षों को संयम और संवाद का रास्ता अपनाना होगा। मामले की निगरानी अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा भी की जा रही है।
Next Story