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BIG BREAKING: निर्माणाधीन गोदाम की छत ढही, 5 मजदूरों की दर्दनाक मौत

Shantanu Roy
24 Jun 2026 3:18 PM IST
BIG BREAKING: निर्माणाधीन गोदाम की छत ढही, 5 मजदूरों की दर्दनाक मौत
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50 से अधिक के मलबे में फंसे
Kolkata. कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार दोपहर एक भीषण हादसा हो गया, जब निर्माणाधीन गोदाम की छत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे में अब तक पांच लोगों की मौत की खबर है, जबकि 50 से अधिक मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कई मजदूरों को मलबे से निकालकर
अस्पताल पहुंचाया
गया है, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। यह हादसा पश्चिम कोलकाता के तारातला थाना क्षेत्र में ब्रेस ब्रिज के पास ट्रांसपोर्ट डिपो रोड स्थित एक निर्माणाधीन गोदाम में हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दोपहर करीब 12 बजे मजदूर रोजाना की तरह निर्माण कार्य में जुटे हुए थे। इसी दौरान अचानक गोदाम का बड़ा हिस्सा और छत ढह गई। देखते ही देखते भारी लोहे की संरचनाएं, सीमेंट और निर्माण सामग्री मजदूरों पर गिर गई, जिससे वहां चीख-पुकार मच गई।
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने राहत कार्य शुरू किया और मलबे में दबे लोगों को निकालने का प्रयास किया। कई लोगों ने अपने हाथों से मलबा हटाकर मजदूरों को बाहर निकालने की कोशिश की। स्थानीय नागरिकों की सूचना पर पुलिस, दमकल विभाग, आपदा प्रबंधन समूह (DMG), सिविल डिफेंस और अन्य बचाव एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंच गईं। घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने सेना की मदद भी ली है। बचाव दल आधुनिक उपकरणों की सहायता से मलबा हटाने में जुटा हुआ है। भारी मलबे को हटाने के लिए क्रेन, जेसीबी मशीनों और गैस कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मलबे के नीचे अभी भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका है, इसलिए बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है।
मौके पर मौजूद अधिकारियों के अनुसार, गोदाम का निर्माण कार्य जारी था और हादसे के समय बड़ी संख्या में मजदूर साइट पर मौजूद थे। छत गिरने के कारण कई लोग सीधे मलबे के नीचे दब गए। कुछ मजदूरों को गंभीर चोटें आई हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों की टीम घायलों के उपचार में जुटी हुई है। घटना के बाद राज्य प्रशासन ने स्थिति पर लगातार नजर रखना शुरू कर दिया है। राहत और बचाव कार्यों की निगरानी के लिए कंट्रोल रूम सक्रिय किया गया है। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी लगातार घटनास्थल का दौरा कर रहे हैं और बचाव अभियान की प्रगति की जानकारी ले रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि छत गिरने से पहले किसी प्रकार की चेतावनी या संकेत नहीं मिला। अचानक जोरदार आवाज के साथ पूरा ढांचा नीचे आ गिरा। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आसपास का इलाका धूल और धुएं के गुबार से भर गया था। कुछ समय तक लोगों को समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक तौर पर निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी खामियों और सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जांच टीम यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि निर्माणाधीन ढांचा आखिर क्यों ढहा और क्या इसमें किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी होता है। यदि निर्माण सामग्री, डिजाइन या तकनीकी प्रक्रिया में कोई कमी रह जाए तो इस प्रकार की दुर्घटनाएं बड़े हादसे का रूप ले सकती हैं। ऐसे मामलों में निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में आती है। फिलहाल बचाव अभियान जारी है और प्रशासन का पूरा ध्यान मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर केंद्रित है। जैसे-जैसे राहत कार्य आगे बढ़ रहा है, मृतकों और
घायलों की संख्या
में बदलाव की आशंका बनी हुई है। पूरे कोलकाता में इस हादसे को लेकर चिंता और दुख का माहौल है। स्थानीय लोगों और मजदूरों के परिजन घटनास्थल और अस्पतालों के बाहर अपने प्रियजनों की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। राहत एवं बचाव कार्य पूरा होने के बाद ही हादसे की वास्तविक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
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