भारत
BIG BREAKING: डोनाल्ड ट्रंप से मिले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
Shantanu Roy
17 Jun 2026 6:30 PM IST

x
बड़ी खबर
New Delhi. नई दिल्ली। आज फिर नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप ने मुलाकात की है। G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात ने एक बार फिर भारत-अमेरिका संबंधों की मौजूदा स्थिति पर चर्चा तेज कर दी है। करीब 16 महीने बाद आमने-सामने आए दोनों नेताओं के बीच इस बार पहले जैसी गर्मजोशी नजर नहीं आई। पहले जहां दोनों नेताओं की मुलाकातें गले मिलकर और आत्मीय अंदाज में सुर्खियां बनाती थीं, वहीं इस बार केवल औपचारिक हाथ मिलाने और सीमित बातचीत तक ही मुलाकात सिमटती दिखी।
ग्रुप फोटो सेशन के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच न तो विशेष संवाद दिखा और न ही पहले जैसी सहजता या आई कॉन्टैक्ट। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने अंदाज में प्रधानमंत्री मोदी का हाथ थपथपाया, लेकिन तस्वीरों में पुराने रिश्तों की चमक गायब दिखी। इस मुलाकात को केवल एक औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों के मौजूदा तनाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब फरवरी 2025 के बाद दोनों नेताओं की पहली औपचारिक बैठक हो रही थी। ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद यह उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच संबंधों में तेजी आएगी, लेकिन पिछले महीनों में कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए हैं।
ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर लगाए गए ऊंचे टैरिफ, पाकिस्तान के साथ बढ़ती अमेरिकी नजदीकियां और इमिग्रेशन नीतियों में बदलाव ने भारत में चिंता बढ़ाई है। इन नीतियों का असर भारतीय छात्रों और पेशेवरों पर भी पड़ा है। वहीं दोनों देशों के बीच लंबे समय से प्रस्तावित ट्रेड डील अभी तक अंतिम रूप नहीं ले पाई है। इसके अलावा ओमान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की मौत ने भी तनाव को बढ़ाया। हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के बाद रिश्तों में सुधार की उम्मीद बनी थी, लेकिन यह घटना उस सकारात्मक माहौल को कमजोर कर गई।
G7 मंच पर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया संसाधनों की कमी से नहीं बल्कि भरोसे की कमी से जूझ रही है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया, जिसे मौजूदा घटनाओं से जोड़कर देखा गया। उनके इस बयान को भारत की कूटनीतिक स्थिति के संकेत के रूप में माना जा रहा है। भारत और अमेरिका के बीच तनाव का असर आर्थिक और रक्षा क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल खरीद को लेकर भारत की आलोचना की और टैरिफ दरों में भारी बढ़ोतरी की। हालांकि बाद में एक फ्रेमवर्क समझौते के तहत कुछ राहत दी गई, लेकिन व्यापक व्यापार समझौता अभी अधर में है।
रक्षा क्षेत्र में भी GE कंपनी द्वारा तेजस Mk1A के इंजन की आपूर्ति में देरी ने चिंता बढ़ाई है। यह परियोजना भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। भारत और अमेरिका के रिश्ते पूरी तरह टूटे नहीं हैं, लेकिन उनमें स्पष्ट ठंडापन जरूर आया है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी बनी हुई है, खासकर चीन की चुनौती को देखते हुए। हालांकि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में बदलते रुख ने समीकरणों को जटिल बना दिया है।
ट्रंप ने पहले अपने बयानों में भारत-पाकिस्तान तनाव खत्म कराने का श्रेय खुद को दिया था, जिसे भारत ने स्वीकार नहीं किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच कई मौकों पर असहज स्थिति बनी रही। फिर भी दोनों पक्ष रिश्तों को पूरी तरह नकार नहीं रहे हैं। हाल ही में ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके लंबे कार्यकाल पर बधाई दी और उन्हें एक मजबूत नेता बताया था। वहीं भारत भी संतुलित और व्यावहारिक रुख अपनाते हुए बातचीत के रास्ते खुले रखे हुए है। कुल मिलाकर G7 में हुई यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंध किस दिशा में जाएंगे, इसका संकेत भी देती है।
Tagsमोदी ट्रंप मुलाकातG7 शिखर सम्मेलनभारत अमेरिका संबंधटैरिफ विवादव्यापार समझौताकूटनीतिक तनावरक्षा सहयोगतेजस इंजनमोदी ट्रंप भेंटमोदी से मिले ट्रंपट्रंप से मिले मोदीडोनाल्ड ट्रंप की मोदी से मुलाकातModi-Trump meetingG7 summitIndia-US relationstariff disputetrade agreementdiplomatic tensionsdefense cooperationTejas engineModi-Trump encounterTrump met ModiModi met TrumpDonald Trump's meeting with Modi
Next Story





