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New Delhi. नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वीडन के गोथेनबर्ग पहुंचे, जहां एयरपोर्ट पर स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। यह यात्रा भारत और स्वीडन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के बीच उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता होगी। इस बातचीत में व्यापार और निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उभरती तकनीक, सप्लाई चेन, रक्षा सहयोग, अंतरिक्ष, जलवायु परिवर्तन और लोगों के बीच आपसी संबंध जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
Prime Minister Narendra Modi landed in Gothenburg, where he was accorded a warm welcome by Sweden PM Ulf Kristersson at the airport.
— ANI (@ANI) May 17, 2026
(Source: DD) pic.twitter.com/3gaIFOECmF
भारत और स्वीडन के आर्थिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 7.75 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह बढ़ता व्यापार दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की मजबूती को दर्शाता है। फिलहाल स्वीडन की 280 से अधिक कंपनियां भारत में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं, वहीं 75 से अधिक भारतीय कंपनियां स्वीडन में अपनी उपस्थिति दर्ज कर चुकी हैं। इससे दोनों देशों के बीच निवेश और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि देखी जा रही है। दौरे के दौरान रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर भी विशेष चर्चा होने की संभावना है। भारत और स्वीडन के बीच रक्षा साझेदारी तेजी से आगे बढ़ रही है। स्वीडन की प्रमुख डिफेंस कंपनी Saab हरियाणा के झज्जर में कार्ल-गुस्ताफ हथियार प्रणाली के लिए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित कर रही है।
यह परियोजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह स्वीडन के बाहर कंपनी का पहला मैन्युफैक्चरिंग प्लांट होगा। साथ ही इसे भारत में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आधारित पहला रक्षा प्रोजेक्ट भी बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सहयोग न केवल रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देगा बल्कि भारत को आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण के लक्ष्य के करीब भी ले जाएगा। इसके अलावा तकनीकी सहयोग और नवाचार के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच नए अवसर खुल सकते हैं। पीएम मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करने और तकनीक आधारित विकास को प्राथमिकता दे रहा है। वहीं स्वीडन भी भारत जैसे बड़े बाजार के साथ अपने संबंधों को और गहरा करना चाहता है। इस दौरे को दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे भविष्य में नए समझौते और परियोजनाओं के रास्ते खुल सकते हैं।
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