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BIG BREAKING: PM मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन शुरू

Shantanu Roy
18 April 2026 8:31 PM IST
BIG BREAKING: PM मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन शुरू
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New Delhi. नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका, जिसके बाद अब प्रधानमंत्री Narendra Modi आज देश को संबोधित करने वाले हैं। इस मुद्दे पर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है और संसद से लेकर चुनावी मंच तक इस पर चर्चा तेज हो गई है। शनिवार को तमिलनाडु में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इस विधेयक के पारित न होने के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मुद्दे पर हार नहीं मानी है और भारतीय जनता पार्टी व राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन इस बिल को पारित कराने के लिए आगे भी प्रयास जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।


लोकसभा में इस संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी। सदन में कुल 528 वोट पड़े, जिनमें से बिल के पक्ष में 298 वोट मिले, जबकि इसे पारित कराने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी। इस प्रकार 54 वोटों की कमी के कारण यह विधेयक पास नहीं हो सका और गिर गया। विधेयक गिरने के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। सत्तापक्ष का कहना है कि विपक्ष ने महिलाओं को आरक्षण देने के इस प्रयास का समर्थन नहीं किया, जबकि विपक्ष की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
इस घटनाक्रम के बाद संसद परिसर में भी विरोध देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी की महिला सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर प्रदर्शन किया और विपक्ष के खिलाफ नारेबाजी की। उनका कहना था कि महिलाओं को अधिकार देने के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। महिला आरक्षण विधेयक को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है और इसे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जाता है। हालांकि, विधेयक पारित न होने के बाद अब यह मुद्दा फिर से राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि इस विधेयक को पारित कराने के लिए अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। वहीं प्रधानमंत्री का देश के नाम संबोधन इस मुद्दे पर आगे की रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल देश की नजर प्रधानमंत्री के संबोधन पर टिकी हुई है, जिसमें इस विधेयक को लेकर सरकार की आगे की योजना स्पष्ट हो सकती है। आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर इस विषय पर और बहस होने की संभावना है।
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