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BIG BREAKING: ट्रंप और जेलेंस्की की बैठक हुई शुरू, इन मुद्दों पर हो रही चर्चा
Shantanu Roy
28 Feb 2025 9:45 PM IST

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New Delhi. नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की के बीच कुछ देर में व्हाइट हाउस में मुलाकात होगी। ट्रम्प और जेलेंस्की के बीच रेयर अर्थ मटेरियल को लेकर डील होगी। दरअसल यूक्रेन, अमेरिका को रेयर अर्थ मटेरियल (दुर्लभ खनिज) देने पर राजी हो गया है। दोनों देशों के अधिकारियों ने मंगलवार को इसकी घोषणा की थी। इस मुलाकात से पहले ट्रम्प से जेलेंस्की को 'तानाशाह' बताने वाले अपने बयान से पलट गए।
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— Umashankar Singh उमाशंकर सिंह (@umashankarsingh) February 28, 2025
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मिलने यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की व्हाइट हाउस पहुँचे
व्हाइट हाउस में पत्रकारों ने उनसे इस टिप्पणी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा "क्या मैंने ऐसा कहा? मुझे यकीन नहीं है कि मैंने ऐसा कहा।" इतना ही नहीं, ट्रम्प ने जेलेंस्की से मुलाकात को लेकर कहा कि जेलेंस्की को लेकर उनके मन में बहुत इज्जत है। उन्होंने कहा, ट्रम्प ने पिछले सप्ताह कहा था कि जेलेंस्की बिना चुनाव वाले तानाशाह हैं। उन्होंने सिर्फ अपनी जिद में देश को लड़ाई में झोंक दिया और लाखों जानें ले लीं। इसके बाद रूस-यूक्रेन जंग के तीन साल पूरे होने पर पर यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा था कि वे शांति की खातिर कुछ भी करने को तैयार हैं। अगर इस्तीफा देने से शांति आती है या यूक्रेन को NATO की सदस्यता मिलती है, तो वे इस्तीफा देने को तैयार हैं।
ट्रम्प करीब एक महीने से यूक्रेन सरकार पर अमेरिका को दुर्लभ खनिज देने को लेकर दबाव बना रहे थे। उनका कहना था कि अगर यूक्रेन को अमेरिकी मदद चाहिए तो उसे 500 बिलियन डॉलर के दुर्लभ खनिज अमेरिका को देने होंगे।उन्होंने जेलेंस्की को धमकी दी थी कि यदि उन्होंने ऐसा नहीं किया तो अमेरिका यूक्रेन को और मदद देना बंद कर देगा। शुरुआत में जेलेंस्की अमेरिका की इस मांग को खारिज करते रहे। हालांकि बाद में वे डील करने को राजी हो गए। एक दिन पहले उन्होंने खुलासा किया कि ट्रम्प युद्ध में अमेरिका से अब तक मदद के नाम पर मिले लगभग 500 अरब डॉलर वापस मांग रहे हैं। अगर हम उन्हें यूक्रेन के खनिजों पर अधिकार नहीं देते तो यूक्रेन की 10 पीढ़ियां 500 अरब डॉलर को चुकाने में खप जातीं।
हालांकि व्हाइट हाउस ने बताया है कि इस समझौते में यूक्रेन के लिए कोई सहायता गारंटी नहीं होगी, न ही अमेरिका की कोई जिम्मेदारी तय की जाएगी। ट्रम्प यूक्रेन के जिन दुर्लभ खनिजों को लेना चाहते हैं, उनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक कार, हथियार और सैन्य उपकरण बनाने में होता है। दुर्लभ खनिजों की ग्लोबल सप्लाई चेन में फिलहाल चीन सबसे बड़ा प्लेयर है। माइनिंग टेक्नोलॉजी की रिपोर्ट के मुताबिक चीन दुनिया के 69% दुर्लभ खनिजों का उत्पादन करता है, जबकि 90% दुर्लभ खनिज चीन में ही प्रोसेस होते हैं। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प दुर्लभ खनिजों की सप्लाई में अमेरिका का हिस्सा बढ़ाना चाहते हैं। फिलहाल अमेरिका इन खनिजों के लिए चीन पर निर्भर है। अमेरिका को दोबारा महान बनाने की बात करने वाले ट्रम्प के लिए ये चिंता की बात है। इससे अमेरिका का आर्थिक और सैन्य मोर्चे पर दांव कमजोर पड़ सकता है। यूक्रेन के लुहांस्क, डोनेत्सक, जपोरेजिया और खेरसॉन पर रूस ने कब्जा कर लिया है। इन प्रांतों में यूक्रेन के कुल खनिज भंडार का 53% हिस्सा है, जिसकी कीमत 6 ट्रिलियन पाउंड यानी 660 लाख करोड़ रुपए हैं। इस पर पुतिन का सितंबर 2022 से कब्जा है।
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