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BIG BREAKING: सीट बंटवारे पर जीतनराम मांझी की नाराज़गी बरकरार, हाईलेवल मीटिंग के बाद भी नहीं बनी बात
Shantanu Roy
11 Oct 2025 7:47 PM IST

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New Delhi. नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो गया है, लेकिन एनडीए गठबंधन के अंदर सीट शेयरिंग को लेकर सियासी खींचतान अब भी जारी है। शनिवार को दिल्ली में हुई एनडीए की हाईलेवल मीटिंग के बावजूद हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की नाराज़गी खत्म नहीं हुई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मांझी अब भी सीट बंटवारे के फार्मूले से असंतुष्ट हैं और वे किसी बड़े राजनीतिक कदम की तैयारी कर रहे हैं।
जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद भी मांझी नाराज़
शनिवार को एनडीए सहयोगी दलों की बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मौजूद थे। इस बैठक में बिहार भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल, जेडीयू और एलजेपी (रामविलास) के नेता भी शामिल हुए। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में एनडीए की सीट शेयरिंग को अंतिम रूप देने की कोशिश की गई, लेकिन HAM प्रमुख जीतनराम मांझी इससे संतुष्ट नहीं हुए। बैठक के बाद उन्होंने जेपी नड्डा से अलग मुलाकात की, मगर मांझी की नाराजगी दूर नहीं हो सकी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, मांझी ने अपने सभी प्रमुख पदाधिकारियों से फोन पर चर्चा कर यह राय मांगी है कि अगर गठबंधन में बात नहीं बनी तो पार्टी अपने दम पर विधानसभा चुनाव मैदान में उतरे। कहा जा रहा है कि यदि एनडीए में समझौता नहीं हुआ, तो HAM 15 से 20 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है।
एनडीए में सीट शेयरिंग पर सहमति लगभग बनी, लेकिन...
एनडीए सूत्रों का कहना है कि भाजपा और जेडीयू के बीच सीट शेयरिंग पर लगभग सहमति बन गई है। सूत्रों के मुताबिक, जेडीयू 101 से 102 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है, जबकि भाजपा को 100 सीटें दी जाएंगी। वहीं, शेष सीटें सहयोगी दलों HAM और एलजेपी (रामविलास) के बीच बांटी जानी हैं। सम्राट चौधरी, विनोद तावड़े और धर्मेंद्र प्रधान की मौजूदगी में हुई इस बैठक में भाजपा ने दावा किया कि एनडीए में सबकुछ ठीक है। बिहार भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि “एनडीए के सभी सहयोगियों से चर्चा सकारात्मक रही है। सीट शेयरिंग का औपचारिक ऐलान आज देर रात या कल सुबह 11 बजे तक कर दिया जाएगा।”
HAM की नाराज़गी की वजह क्या है?
जीतनराम मांझी की नाराज़गी की सबसे बड़ी वजह सीटों की संख्या बताई जा रही है। HAM को अब तक जो प्रस्ताव दिया गया है, उसमें पार्टी को महज 6 से 7 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है। जबकि मांझी कम से कम 10 से 12 सीटों की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, कुछ सीटों पर जेडीयू और HAM दोनों का दावा होने के कारण टकराव की स्थिति भी बनी हुई है। सूत्रों का कहना है कि मांझी यह भी चाहते हैं कि उनकी पार्टी को शासन में भागीदारी और कुछ प्रमुख बोर्डों में प्रतिनिधित्व मिले।
मांझी के स्वतंत्र रुख से BJP-जेडीयू में बढ़ी चिंता
मांझी के तेवरों ने एनडीए की रणनीति को थोड़ा मुश्किल बना दिया है। सूत्रों के मुताबिक, अगर HAM अलग होकर 15-20 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारती है, तो इससे एनडीए के वोट बैंक पर असर पड़ सकता है, खासकर मगध और गया क्षेत्र में जहां मांझी का परंपरागत प्रभाव माना जाता है। एनडीए रणनीतिकारों का मानना है कि भले ही HAM की सीट संख्या कम हो, लेकिन मांझी का दलित और महादलित वर्ग पर प्रभाव कई सीटों पर निर्णायक साबित हो सकता है।
भाजपा और जेडीयू में बनी तालमेल की समझ
भाजपा और जेडीयू ने फिलहाल संतुलन साधने की कोशिश की है। दोनों दलों के बीच यह तय हुआ है कि 2019 लोकसभा चुनाव और 2020 विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन को आधार मानकर सीटों का वितरण होगा।बैठक में यह भी तय हुआ कि उम्मीदवारों के नाम पर अंतिम निर्णय संयुक्त समिति लेगी, जिसमें भाजपा और जेडीयू के वरिष्ठ नेता शामिल रहेंगे। एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया “हम नहीं चाहते कि सहयोगियों में असंतोष रहे। सभी को सम्मानजनक हिस्सेदारी देने की कोशिश हो रही है। लेकिन अगर कोई दल अपनी सीमाओं से ज्यादा मांग करेगा, तो वह खुद नुकसान उठाएगा।”
एनडीए में एकता दिखाने की कोशिश, लेकिन असंतोष बरकरार
भले ही भाजपा के नेता यह दावा कर रहे हैं कि एनडीए में कोई विवाद नहीं, लेकिन अंदरखाने की स्थिति कुछ और है। HAM और एलजेपी (रामविलास) दोनों ही अपने लिए बेहतर डील की मांग कर रहे हैं। एलजेपी (रामविलास) की ओर से चिराग पासवान भी पहले सीटों की संख्या को लेकर असंतोष जता चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सीट शेयरिंग में देरी और सहयोगियों की नाराज़गी, चुनावी माहौल पर असर डाल सकती है। मांझी का रुख इस समय किंगमेकर या डिस्टर्बर दोनों में से किसी भूमिका का संकेत दे रहा है।
रविवार को सीट बंटवारे का ऐलान संभव
भाजपा के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े ने कहा है कि सीटों के बंटवारे पर बातचीत अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि “एनडीए एकजुट है, सब दल मिलकर चुनाव लड़ेंगे। रविवार तक सब साफ हो जाएगा।” हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मांझी आखिरी समय में एनडीए के साथ बने रहते हैं या अपनी अलग राह चुनते हैं। अगर वे अलग होते हैं, तो बिहार चुनाव में एनडीए के लिए यह एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।
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