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BIG BREAKING: स्कूलों को मिली बम धमकी ई-मेल के पीछे 12 साल का बच्चा निकला मास्टरमाइंड
Shantanu Roy
16 July 2025 9:36 PM IST

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बड़ी खबर
New Delhi. नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के स्कूलों को लगातार मिल रही बम धमकी की ई-मेल से मचे हड़कंप के बीच पुलिस ने बुधवार को बड़ा खुलासा किया है। ड्वारका के सेंट थॉमस स्कूल को 15 जुलाई को भेजी गई धमकी भरी ई-मेल के पीछे कोई आतंकी साजिश नहीं, बल्कि एक 12 वर्षीय बच्चे की शरारत थी। यह ई-मेल स्कूल में छुट्टी कराने के इरादे से भेजा गया था।
कैसे हुआ खुलासा
सेंट थॉमस स्कूल को 15 जुलाई की सुबह एक ई-मेल मिला, जिसमें स्कूल में बम रखने की धमकी दी गई थी। इस मेल के बाद स्कूल में अफरा-तफरी मच गई और बच्चों को तत्काल स्कूल से बाहर निकाला गया। साइबर क्राइम सेल और स्पेशल स्टाफ ने तुरंत जांच शुरू की और कुछ ही घंटों में ई-मेल भेजने वाले 12 साल के लड़के को चिन्हित कर लिया। दिल्ली पुलिस के डीसीपी द्वारका अंकित सिंह ने बताया कि उक्त बच्चा किसी भी स्कूल का छात्र नहीं है। पूछताछ और काउंसलिंग के बाद उसे परिवार को सौंप दिया गया है।
एक और धमकी और बढ़ता डर
16 जुलाई की सुबह भी सेंट थॉमस स्कूल को एक और धमकी भरा ई-मेल प्राप्त हुआ। इस संदर्भ में जांच अभी भी जारी है। प्रारंभिक जांच में यह भी बच्चों की करतूत प्रतीत हो रही है, जो शायद छुट्टी करवाने या मज़ाक के तौर पर इसे अंजाम दे रहे हैं।
अन्य स्कूलों को भी मिली धमकियां
यह पहली घटना नहीं है। बीते तीन दिनों में दिल्ली के कई नामचीन स्कूलों को बम धमकी भरे ई-मेल मिले हैं।
मंगलवार, 15 जुलाई को ड्वारका के सेंट थॉमस स्कूल और स्टीफन कॉलेज को बम की धमकी मिली थी।
बुधवार, 16 जुलाई को वसंत वैली, मदर इंटरनेशनल, रिचमंड ग्लोबल, सरदार पटेल विद्यालय और सेंट थॉमस (फिर से) को धमकी भरे ई-मेल मिले।
सभी स्थानों पर बम डिस्पोजल स्क्वॉड ने व्यापक तलाशी अभियान चलाया, लेकिन कहीं से कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली।
पुलिस की चेतावनी और अपील
पुलिस का कहना है कि इन धमकियों के पीछे किसी गंभीर आतंकी साजिश के संकेत नहीं हैं, बल्कि बच्चों द्वारा किया गया मज़ाक या डर फैलाने की कोशिश है। साइबर सेल द्वारा हर मेल की गंभीरता से जांच की जा रही है। डीसीपी अंकित सिंह ने कहा, "माता-पिता और स्कूल प्रबंधन को घबराने की आवश्यकता नहीं है। सभी स्कूलों में सुरक्षा मानकों का पूरा पालन किया जा रहा है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाएं आईटी अधिनियम और किशोर न्याय कानून के तहत गंभीर अपराध हैं और पुलिस किसी को भी बख्शने के मूड में नहीं है। साथ ही उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों पर इंटरनेट उपयोग और ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें।
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