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BIG BREAKING: इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या के 5 दोषियों को मिला आजीवन कारावास
Shantanu Roy
1 Aug 2025 10:24 PM IST

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बड़ी खबर
Bulandshahr. बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश के चर्चित स्याना हिंसा मामले में आज 7 साल बाद बड़ा फैसला आया है। एडीजे-12 कोर्ट ने 3 दिसंबर 2018 को बुलंदशहर जिले के स्याना क्षेत्र के चिंगरावठी में हुई हिंसा मामले में 38 आरोपियों को दोषी करार दिया है। विशेष रूप से कोर्ट ने इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या के मामले में 5 आरोपियों को दोषी मानते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एडीजे-12 गोपाल जी की अदालत ने शुक्रवार, 1 अगस्त को फैसला सुनाते हुए कहा कि कुल 44 आरोपियों में से 5 की ट्रायल के दौरान मृत्यु हो चुकी है और एक आरोपी बाल अपचारी है, जिसकी सुनवाई अलग से चल रही है। बाकी 38 आरोपियों में से 5 को धारा 302 (हत्या) में दोषी माना गया है, जबकि अन्य 33 आरोपियों को बलवा, आगजनी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और पुलिस पर हमला जैसे गंभीर अपराधों में दोषी करार दिया गया है।
ये हैं हत्याकांड के दोषी
कोर्ट ने इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की हत्या के जिन पांच आरोपियों को दोषी पाया है, उनके नाम हैं — प्रशांत नट, डेविड, जॉनी, राहुल और लोकेन्द्र उर्फ मामा। इन सभी को उम्रकैद की सजा के साथ-साथ आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
33 अन्य को 7 साल की सजा
बाकी के 33 आरोपियों को अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 147 (दंगा), 148 (घातक हथियारों से लैस होकर दंगा), 149 (गैरकानूनी जमावड़े में अपराध करना), 436 (आगजनी), 332 (सरकारी कर्मचारी को चोट पहुँचाना), 353 (सरकारी कार्य में बाधा डालना) आदि धाराओं में दोषी पाया। इन्हें 7 साल की सश्रम सजा और आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
विशेष लोक अभियोजक का बयान
इस मामले में विशेष लोक अभियोजक यशपाल सिंह राघव ने मीडिया को बताया कि कुल 5 आरोपी हत्या के दोषी पाए गए हैं जिन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गई है। उन्होंने कहा कि यह मामला राज्य के लिए बेहद संवेदनशील था और हमने हर सबूत को ठोस रूप में पेश किया। अदालत ने सभी साक्ष्यों को स्वीकार करते हुए यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है।
बेटे श्रेय ने कहा – न्याय मिला है
इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के बेटे श्रेय ने कोर्ट के फैसले पर संतोष जताते हुए कहा, “हमने यह साबित किया कि मेरे पिता के साथ क्या अन्याय हुआ था और किन लोगों ने यह किया। मुझे खुशी है कि कोर्ट ने मेरी बातों को सुना और दोषियों को सजा मिली। यदि दूसरा पक्ष हाईकोर्ट जाता है तो हम भी वहां अपनी बात मजबूती से रखेंगे। मेरे पिता को इंसाफ मिल रहा है, यही मेरी सबसे बड़ी उम्मीद थी।”
क्या थी घटना?
3 दिसंबर 2018 को बुलंदशहर के स्याना थाना क्षेत्र के चिंगरावठी गांव में गौकशी की अफवाह के बाद अचानक हिंसा भड़क उठी थी। हिंसक भीड़ ने पुलिस चौकी को आग के हवाले कर दिया और तोड़फोड़ की। इसी हिंसा में तत्कालीन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और एक स्थानीय युवक सुमित की मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे उत्तर प्रदेश को झकझोर दिया था और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।
हिंसा की पृष्ठभूमि
घटना के समय चिंगरावठी चौकी पर पुलिस गौकशी की सूचना के आधार पर जांच कर रही थी। इसी दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और उग्र भीड़ वहां इकट्ठा हो गई। विवाद बढ़ते-बढ़ते हिंसा में तब्दील हो गया और देखते ही देखते चौकी को फूंक दिया गया। इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को भीड़ ने घेरकर पीटा और गोली मार दी। वे गौ-हत्या के मामलों की जांच कर रहे थे और अखलाक हत्याकांड के जांच अधिकारी भी रह चुके थे।
राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद प्रदेश में भारी राजनीतिक हलचल मच गई थी। राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर विपक्ष ने तीखे सवाल उठाए थे। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के परिवार को 50 लाख रुपये की सहायता, एक परिजन को सरकारी नौकरी और एक सड़क का नामकरण उनके नाम पर करने की घोषणा की थी।
न्याय की राह रही लंबी
इस केस में पुलिस ने 44 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। 5 की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी और एक बाल अपचारी को छोड़कर शेष सभी पर सुनवाई जारी थी। यह मुकदमा वर्षों तक खिंचा, लेकिन अंततः साक्ष्यों, गवाहों और वैज्ञानिक जांच के आधार पर कोर्ट ने दोषियों को सजा दी।
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