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अमेरिका ने PERM आवेदन रोके
दिल्ली। अमेरिका में काम कर रहे भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल समेत कई प्रमुख आईटी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (PERM) से निलंबित कर दिया है। अमेरिकी श्रम विभाग ने विदेशी कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से जुड़ी व्यवस्था के कथित दुरुपयोग को लेकर यह कार्रवाई की है। इससे अमेरिका में स्थायी निवास की प्रक्रिया में शामिल भारतीय कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सॉन्डरलिंग ने गुरुवार को इस कार्रवाई की घोषणा की। निलंबित कंपनियों में कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी शामिल हैं। इनके अलावा माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को भी इस कार्यक्रम से निलंबित किया गया है।
श्रम विभाग के अनुसार, इन कंपनियों से जुड़े नए PERM आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसके साथ ही पहले से लंबित आवेदनों की प्रक्रिया भी रोक दी जाएगी। विभाग ने कहा कि संबंधित कंपनियों के खिलाफ संघीय स्तर पर जांच जारी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस मामले में माइक्रोसॉफ्ट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कंपनी ने वर्ष 2025 में लगभग छह हजार अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की थी। इसके बावजूद कंपनी को छह हजार से अधिक एच-1बी वीजा की मंजूरी मिली और उसने 3,682 PERM आवेदन दाखिल किए।
वेंस के अनुसार, लगभग एक हजार आवेदन ऐसे पदों से संबंधित थे, जिनसे अमेरिकी कर्मचारियों को हटाया गया था। हालांकि, ये अमेरिकी प्रशासन की ओर से लगाए गए आरोप हैं। कंपनियों के खिलाफ सभी आरोपों के न्यायिक रूप से सिद्ध होने की जानकारी नहीं है।
PERM अमेरिका के श्रम विभाग की एक महत्वपूर्ण प्रमाणन प्रक्रिया है। इसके तहत कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को स्थायी रोजगार देने और रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए आवेदन करती हैं। सामान्यतः नियोक्ता को यह दिखाना होता है कि संबंधित पद के लिए उपयुक्त और उपलब्ध अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिल रहे हैं। इस प्रक्रिया में निलंबन का सबसे अधिक असर उन विदेशी पेशेवरों पर पड़ सकता है, जिनकी ग्रीन कार्ड संबंधी प्रक्रिया अभी शुरू होनी है या जिनके आवेदन लंबित हैं। विशेष रूप से लंबे समय से अमेरिका में काम कर रहे भारतीय आईटी कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास की प्रतीक्षा और बढ़ सकती है।
हालांकि, इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित कंपनियों के सभी एच-1बी वीजा रद्द हो गए हैं। एच-1बी एक अस्थायी रोजगार वीजा है, जबकि PERM रोजगार आधारित स्थायी निवास की प्रक्रिया का हिस्सा है। इसलिए दोनों व्यवस्थाओं के बीच अंतर समझना जरूरी है। PERM प्रक्रिया प्रभावित होने से एच-1बी वीजा पर कार्यरत उन कर्मचारियों के सामने अतिरिक्त अनिश्चितता पैदा हो सकती है, जो ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसका वास्तविक असर प्रत्येक कर्मचारी की वीजा अवधि और आवेदन की स्थिति पर निर्भर करेगा।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य विदेशी कर्मचारियों की भर्ती से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना और अमेरिकी नागरिकों के रोजगार अवसरों की रक्षा करना है। फिलहाल निलंबन कितने समय तक जारी रहेगा, इसकी निश्चित अवधि स्पष्ट नहीं की गई है। संबंधित कंपनियों के खिलाफ जारी जांच और आगे के प्रशासनिक फैसलों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होगी। इस कार्रवाई से भारतीय आईटी कंपनियों के साथ उन हजारों पेशेवरों की चिंता भी बढ़ गई है, जो अमेरिका में लंबे समय तक काम करने और स्थायी निवास हासिल करने की योजना बना रहे हैं।
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