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इस्तीफा
Hariyana हरियाणा: राजनीति में एक बड़ी हलचल मच गई है। प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व मंत्री संपत सिंह ने रविवार को कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे ने न केवल पार्टी संगठन में हलचल पैदा की है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को भी उजागर कर दिया है। संपत सिंह, जो लंबे समय से हरियाणा कांग्रेस के एक प्रमुख चेहरे माने जाते थे, ने अपने त्यागपत्र में लिखा कि पार्टी अब “अपनी मूल विचारधारा से भटक चुकी है” और “जनता के मुद्दों से कट चुकी है।” उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस में समर्पित कार्यकर्ताओं की आवाज को दबा दिया जाता है और निर्णय सिर्फ कुछ गिने-चुने नेताओं तक सीमित रह गए हैं।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस अब उस रूप में नहीं रही, जिसके लिए मैंने दशकों तक काम किया। अब यह पार्टी जनता की उम्मीदों से नहीं, बल्कि कुछ नेताओं के निजी स्वार्थों से चल रही है। मैं ऐसे संगठन में नहीं रह सकता जो जनसरोकारों से दूर हो गया हो। जानकारी के मुताबिक, संपत सिंह पिछले कुछ महीनों से पार्टी की नीतियों से असहमत चल रहे थे। वे खास तौर पर हरियाणा प्रदेश कांग्रेस में बढ़ते गुटबाजी और नेतृत्व संकट को लेकर नाराज़ थे। सूत्रों का कहना है कि उन्होंने कई बार आलाकमान को इस स्थिति से अवगत कराया, लेकिन उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया।
संपत सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी (BJP) से की थी और बाद में वह कांग्रेस में शामिल हुए। वे हरियाणा सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और प्रदेश के हिसार, भिवानी व सिरसा क्षेत्रों में उनका अच्छा जनाधार है। उनके कांग्रेस छोड़ने से इन इलाकों में पार्टी की स्थिति कमजोर हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह इस्तीफा कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी हरियाणा में संगठन को मज़बूत करने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में उनके किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होने की अटकलें भी तेज हैं। कई सूत्रों का कहना है कि वे जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) या जेजेपी (जननायक जनता पार्टी) के संपर्क में आ सकते हैं।
कांग्रेस की ओर से अभी तक संपत सिंह के इस्तीफे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं ने अनौपचारिक रूप से इसे “व्यक्तिगत फैसला” बताया है। संपत सिंह ने अपने बयान के अंत में कहा, “मैंने हमेशा जनता की सेवा को प्राथमिकता दी है। आगे भी राजनीति में रहकर जनता के मुद्दों पर आवाज उठाऊंगा, लेकिन अब कांग्रेस का हिस्सा नहीं रहूंगा। उनके इस कदम से हरियाणा की सियासत में नई हलचल पैदा हो गई है और यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी दिनों में वह किस राजनीतिक दिशा में कदम बढ़ाते हैं।
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