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भुलेश्वर महादेव: देश का पहला मंदिर जहां शिव से मुख मोड़कर बैठते हैं नंदी महाराज, छुपे हैं कई रहस्य

jantaserishta.com
20 Dec 2025 4:13 PM IST
भुलेश्वर महादेव: देश का पहला मंदिर जहां शिव से मुख मोड़कर बैठते हैं नंदी महाराज, छुपे हैं कई रहस्य
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शिवलिंग के ठीक नीचे एक गुफा है, जहां पुजारियों द्वारा रोजाना प्रसाद चढ़ाया जाता है और प्रसाद का कुछ हिस्सा गायब हो जाता है.
महाराष्ट्र: भगवान शिव के अनन्य भक्तों में नंदी महाराज की गिनती होती है, क्योंकि उन्होंने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। हर मंदिर में जहां भगवान शिव विराजमान हैं, वहां उनकी सेवा के लिए नंदी महाराज विराजमान हैं, लेकिन महाराष्ट्र के एक अद्भुत मंदिर में नंदी, भगवान शिव से मुंह मोड़कर बैठे हैं। ये नजारा भुलेश्वर महादेव मंदिर में देखने को मिलता है।
महाराष्ट्र के पुणे-सोलापुर राजमार्ग से 10 किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ियों के पास भुलेश्वर महादेव मंदिर स्थापित है। यह मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है और इसका निर्माण 8वीं शताब्दी में हुआ था। इसकी दीवारों पर शास्त्रीय नक्काशी है और इसे संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। ये मंदिर अपने बारे में प्रचलित लोककथा के लिए भी जाना जाता है, जिसके अनुसार जब शिवलिंग पर मिठाई या पेड़े का भोग लगाया जाता है तो एक या एक से अधिक मिठाइयां गायब हो जाती हैं।
दरअसल, शिवलिंग के ठीक नीचे एक गुफा है, जहां पुजारियों द्वारा रोजाना प्रसाद चढ़ाया जाता है और प्रसाद का कुछ हिस्सा गायब हो जाता है। किसी को नहीं पता कि प्रसाद का हिस्सा कहां जाता है। माना जाता है कि भगवान खुद आकर प्रसाद को भोग लगाते हैं।
मंदिर की खास बात ये भी है कि मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव, गणेश और कार्तिकेय की स्त्री वेश वाली प्रतिमाएं मौजूद हैं। भक्त शिवलिंग के अलावा, स्त्री वेश धारण किए भगवान शिव, गणेश और कार्तिकेय का आशीर्वाद लेने आते हैं।
हर मंदिर में जहां शिवलिंग के सामने नंदी का मुख होता है, लेकिन भुलेश्वर महादेव का नजारा अलग है। मंदिर में नंदी महाराज की गर्दन भगवान शिव को न देखते हुए दाईं साइड मुड़ी हुई है। प्रचलित कथा के मुताबिक जब मां पार्वती भगवान शिव को वापस लेने के लिए आईं थीं, तब नंदी ने दोनों दंपत्ति को न देखते हुए चेहरा मोड़ लिया था। तब से लेकर अब तक नंदी इसी अवस्था में विराजमान है।
एक अन्य कथा के अनुसार, एक बार मां पार्वती से क्रोधित होकर भगवान शिव ने कैलाश छोड़ इसी स्थान पर सालों तक तपस्या की थी। भगवान शिव को मनाने के लिए मां पार्वती ने बेहद सुंदर रूप लिया और अपने नृत्य से भगवान शिव को प्रसन्न करने की कोशिश की। मां पार्वती का इतना मोहित रूप देखकर भगवान शिव अपना सारा गुस्सा भूल गए थे और वापस मां के साथ कैलाश प्रस्थान किया था। इसी वजह से मंदिर का नाम भुलेश्वर महादेव पड़ा।
1000 साल पुराने इस मंदिर का बनाव और वास्तुकला बहुत अलग है, जिसमें मुगलकाल से लेकर मराठा सभ्यता की झलक देखने को मिलती है। मंदिर को कई बार तोड़ा गया और कई बार बनाया गया। मंदिर बाहर से ताजमहल की तरह दिखता है, लेकिन अंदर से बहुत प्राचीन है। मंदिर के स्तंभों पर स्त्री रूप धारण किए गणेश और भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा मौजूद है।
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