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अमित शाह से मिले भगवंत मान, पंजाब में तैनात होंगी पैरामिलिट्री फोर्स की 10 और कंपनियां

jantaserishta.com
19 May 2022 11:40 AM GMT
अमित शाह से मिले भगवंत मान, पंजाब में तैनात होंगी पैरामिलिट्री फोर्स की 10 और कंपनियां
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नई दिल्ली: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से आज मुलाकात की. मुलाकात के दौरान पंजाब सरकार की मांग को केद्रीय गृह मंत्री ने स्वीकार कर लिया. दरअसल, जून के पहले सप्ताह में ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी है. इसे देखते हुए भगवंत मान ने राज्य में अतिरिक्त केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग की थी. पंजाब सरकार की इस मांग को केंद्र सरकार ने मान लिया है.

पंजाब के मुख्यमंत्री के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पैरामिलिट्री फोर्स की 10 कंपनियों को पंजाब में तैनात करने की मंजूरी दी है. इसके अलावा 10 और कंपनियां गृह मंत्रालय ने देने को कहा है. गुरुवार को भगवंत मान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करने के लिए दिल्ली में नॉर्थ ब्लॉक पहुंचे थे.
अमित शाह से मुलाकात के बाद भगवंत मान ने कहा कि आज हमारी महत्वपूर्ण बैठक हुई है. मुख्यमंत्री बनने के बाद हमारी पहली बार यह बैठक गृह मंत्री के साथ हुई है. पंजाब के मुद्दों पर गृह मंत्री से बातचीत हुई. साथ ही कानून व्यवस्था पर भी बातचीत गृहमंत्री से हुई. राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले पर पार्टी स्तर से ऊपर उठकर मदद कराने का आश्वासन दिया गया. भगवंत मान ने कहा कि ड्रोन की जो समस्याएं हो रही है, हमने गृह मंत्रालय से एंटी ड्रोन सिस्टम की मांग की है और यह भी कहा है कि इस को जल्द से जल्द लगाया जाए.
भगवंत मान सिंह ने कहा कि गृह मंत्री ने उनको आश्वासन दिया कि पंजाब में राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर जब भी चाहे तब भी हमसे बात कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा. मान ने कहा कि राजनीति से ऊपर उठकर काम किया जाएगा. हमें 10 पैरामिलिट्री फोर्सेस की कंपनियां पिछले दिनों दे दी गई हैं. 10 और पैरामिलिट्री फोर्स की कंपनियां हमें दे दी जाएंगे. मैंने यह कहा है कि पंजाब की धरती बहुत फर्टाइल है जो भी बीज बोएंगे. वह वहां पर उग जाएगा लेकिन नफरत का बीज नहीं होने दिया जाएगा.
1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार शुरू किया गया. एक जून से ही सेना ने स्वर्ण मंदिर की घेराबंदी शुरू कर दी थी. पंजाब से आने-जाने वाली रेलगाड़ियों को रोक दिया गया. बस सेवाएं रोक दी गईं. फोन कनेक्शन काट दिए गए और विदेशी मीडिया को राज्य से बाहर जाने को कह दिया गया. 3 जून 1984 को पंजाब में कर्फ्यू लगा दिया गया. 4 जून की शाम से सेना ने गोलीबारी शुरू कर दी. अगले दिन सेना की बख्तरबंद गाड़ियां और टैंक भी स्वर्ण मंदिर पर पहुंच गए. भीषण खून-खराबा हुआ था.
6 जून को भिंडरावाले को मार दिया गया. स्वर्ण मंदिर पर केंद्र सरकार की इस कार्रवाई का देशभर में विरोध हुआ. सिख समुदाय ने इसकी आलोचना की. कांग्रेस में भी फूट पड़ गई. इस कार्रवाई में आम लोगों की मौत के विरोध में कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत कांग्रेस के कई नेताओं ने इस्तीफा दे दिया. कई सिख लेखकों ने अपने पुरस्कार लौटा दिए थे.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस ऑपरेशन में 83 सैनिक शहीद हुए थे और 249 घायल हुए थे. वहीं, 493 चरमपंथी या आम नागरिक मारे गए थे और 86 लोग घायल हुए थे. 1592 लोगों को गिरफ्तार किया गया था.
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