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Birbhum बीरभूम: राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के पांचवीं पीढ़ी के वंशज जॉयदीप चट्टोपाध्याय ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ भारत माता को श्रद्धांजलि देने वाला गीत है और इसमें किसी तरह का धार्मिक पहलू नहीं है।
जॉयदीप चट्टोपाध्याय ने कहा कि हर व्यक्ति के अंदर देशभक्ति की भावना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय भी देशप्रेम को बहुत महत्व देते थे और उनके लिए राष्ट्रभक्ति एक बड़ा मूल्य था। उन्होंने कहा कि जाति, धर्म या रंग से अलग होकर शिक्षित लोगों को ‘वंदे मातरम’ को गर्व के साथ गाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग इसे नहीं गाते, उन्हें समझाकर इसके महत्व से अवगत कराया जाना चाहिए।
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान एक महत्वपूर्ण नारा और प्रेरणा का स्रोत बना। समय के साथ यह गीत देशभक्ति की भावना से जुड़ गया। जॉयदीप चट्टोपाध्याय ने कहा कि इस गीत का उद्देश्य लोगों में भारत के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना पैदा करना है। उन्होंने कहा कि इसे किसी धार्मिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों में राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और एकता की भावना जरूरी है। उनके अनुसार, देशभक्ति सभी लोगों को जोड़ने वाली भावना होनी चाहिए। ‘वंदे मातरम’ को लेकर समय-समय पर अलग-अलग विचार सामने आते रहे हैं। कुछ लोग इसे भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़कर देखते हैं, जबकि कुछ लोग इसके विभिन्न पहलुओं पर अपनी राय रखते हैं। जॉयदीप चट्टोपाध्याय ने इस गीत को राष्ट्रीय भावना और मातृभूमि के सम्मान से जुड़ा बताया।
उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना का उद्देश्य समाज में जागरूकता और देश के प्रति समर्पण की भावना पैदा करना था। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे गीत के मूल भाव को समझें और देश के प्रति सकारात्मक सोच रखें। बीरभूम में दिए गए इस बयान के बाद ‘वंदे मातरम’ को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। जॉयदीप चट्टोपाध्याय ने अपने पूर्वज की रचना के भाव और महत्व को सामने रखते हुए इसे देशप्रेम से जुड़ा बताया।
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