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Dhaka ढाका। बांग्लादेश में युवाओं के बढ़ते रोजगार संकट की सबसे बड़ी वजह कमजोर शिक्षा व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण सीखने के अवसरों की कमी है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि छात्र श्रम बाजार में प्रवेश करने से पहले ही ऐसी शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बन जाते हैं, जो उन्हें रोजगार के लिए आवश्यक कौशल उपलब्ध नहीं करा पाती। बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्र 'द डेली स्टार' में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, देश में शिक्षा पर सार्वजनिक खर्च सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के दो प्रतिशत से भी कम है। यह यूनेस्को द्वारा सुझाए गए 4 से 6 प्रतिशत के स्तर से काफी नीचे है और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे कम है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि शिक्षा पर कम निवेश का असर सीखने के स्तर पर साफ दिखाई देता है। 7 से 14 वर्ष आयु वर्ग के केवल 49 प्रतिशत बच्चों में ही पढ़ने और बुनियादी गणित की क्षमता विकसित हो पाती है, जिससे आगे चलकर उनकी रोजगार क्षमता प्रभावित होती है। रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश की आबादी 17.5 करोड़ से अधिक है। इनमें लगभग 4.7 करोड़ युवा 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के हैं, जो कई देशों की कुल आबादी से भी अधिक है। देश की आधी से ज्यादा आबादी 25 वर्ष से कम उम्र की है, जबकि औसत आयु लगभग 27 वर्ष है। हर साल करीब 20 लाख युवा कामकाजी आयु वर्ग में प्रवेश करते हैं, लेकिन अधिकांश को अपनी योग्यता के अनुरूप रोजगार नहीं मिल पाता।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरी की आयु सीमा (32 वर्ष) तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते रहते हैं। इसके बाद वे निजी क्षेत्र का रुख करते हैं या फिर रोजगार की तलाश में देश छोड़ देते हैं। विश्व जनसंख्या दिवस 2026 की थीम 'युवाओं की उम्मीदों और आकांक्षाओं को आज और भविष्य में साकार करना' बांग्लादेश के लिए अब भी एक अनुत्तरित सवाल बनी हुई है। रिपोर्ट में शिक्षा प्रणाली की आलोचना करते हुए कहा गया है कि यहां रटने की संस्कृति पर अधिक जोर है, जबकि आलोचनात्मक सोच और व्यावहारिक कौशल के विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच भी प्रभावी तालमेल का अभाव है। परिणामस्वरूप, कई उच्च माध्यमिक (एचएससी) उत्तीर्ण छात्रों का शैक्षणिक स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सातवीं कक्षा के बराबर रह जाता है और वे चौथी औद्योगिक क्रांति की जरूरतों के अनुरूप तैयार नहीं हो पाते।
रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी दर 2013 में 9.7 प्रतिशत थी, जो 2022 में बढ़कर 27.8 प्रतिशत हो गई। वहीं, लगभग हर पांच में से एक युवा न तो रोजगार में है, न शिक्षा में और न ही किसी प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़ा है। 15 से 24 वर्ष आयु वर्ग में यह आंकड़ा करीब 40 प्रतिशत है, जो वैश्विक औसत से लगभग दोगुना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़ी संख्या में युवा इस स्थिति से निकलने के लिए संघर्ष के बजाय विदेश पलायन को बेहतर विकल्प मान रहे हैं। लगभग 55 प्रतिशत युवा बेहतर अवसरों और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद में विदेश जाना चाहते हैं। वर्ष 1990 से 2024 के बीच विदेश में रहने वाले बांग्लादेशियों की संख्या 50.8 लाख से बढ़कर 87 लाख हो गई, जो देश की कुल आबादी का लगभग 5 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लैंगिक असमानता और भौगोलिक विषमताएं इस संकट को और गंभीर बना रही हैं। बांग्लादेश में अब भी एशिया में बाल विवाह की सबसे ऊंची दर दर्ज की जाती है, जहां 51 प्रतिशत महिलाएं 18 वर्ष से पहले विवाह कर लेती हैं। वहीं, उप-सहारा अफ्रीका के बाहर किशोरावस्था में गर्भधारण की दर भी दुनिया में सबसे अधिक है।
रिपोर्ट के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की श्रम भागीदारी 2016 के 31 प्रतिशत से घटकर 2023 में 25 प्रतिशत रह गई है। हालांकि, अब पहले की तुलना में अधिक युवा महिलाएं कम वेतन वाले असंगठित कार्य या कम उम्र में विवाह करने के बजाय विदेश पलायन का विकल्प चुन रही हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि नीति निर्माण की प्रक्रिया में युवाओं की भागीदारी बेहद सीमित है, जिससे उनके भविष्य को प्रभावित करने वाले फैसलों में उनकी आवाज पर्याप्त रूप से शामिल नहीं हो पाती।
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