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विरोध के बाद प्रशासन ने जारी किया दूसरा नोटिस
बांग्लादेश : जगन्नाथ यूनिवर्सिटी में मंदिर के पास गोमांस की खिचड़ी बनाने को लेकर विवाद शुरू हुआ। इसके बाद प्रशासन ने कैंपस में पशु वध से बचने की अपील की, जिसका कुछ छात्रों ने विरोध किया। छात्रों ने गाय काटकर दावत करने का ऐलान किया तो प्रशासन ने दूसरा नोटिस जारी किया। इसमें आयोजन की अनुमति देते हुए दूसरे लोगों की धार्मिक गतिविधियों में बाधा नहीं डालने की शर्त रखी गई।
मंदिर के पास गोमांस पकाने से शुरू हुआ विवाद
बांग्लादेश की जगन्नाथ यूनिवर्सिटी में गोमांस पकाने को लेकर शुरू हुआ विवाद कुछ ही दिनों में बढ़ गया। मामला 12 अक्टूबर का है, जब विश्वविद्यालय के इस्लामिक हिस्ट्री एंड कल्चर विभाग के 17वें बैच के छात्रों ने कैंपस में गोमांस की खिचड़ी बनाने का कार्यक्रम रखा। इसके लिए उन्होंने विश्वविद्यालय के केंद्रीय मंदिर के पास की जगह चुनी थी।
मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य सचिव जॉय साहा के मुताबिक, वहां गोमांस पकता देखकर कुछ हिंदू छात्रों ने विरोध जताया। स्थिति बढ़ने पर विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर को बीच में आना पड़ा। इसके बाद खाना बनाने वाले छात्र मंदिर से कुछ दूर चले गए और वहां भोजन तैयार किया।
कार्यक्रम आयोजित करने वाले छात्रों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाना नहीं था। उन्होंने चूल्हा बनाने के लिए मंदिर के पास इस्तेमाल की गई ईंटें वापस रख दीं और कैंटीन से लोहे का चूल्हा मंगाकर खाना बनाया। जॉय साहा ने बताया कि मंदिर समिति की मुख्य आपत्ति ईंटों के इस्तेमाल से ज्यादा मंदिर के इतने करीब खाना बनाने को लेकर थी। इसी रात सनातनी छात्रों ने कैंपस में मार्च निकाला। इसके बाद सोशल मीडिया पर भी यह विवाद चर्चा में आ गया।
प्रशासन ने जारी किया पशु वध से बचने का नोटिस
विवाद के दो दिन बाद, 14 अक्टूबर को विश्वविद्यालय प्रशासन ने कैंपस में पशु काटने से बचने के लिए नोटिस जारी किया। इसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य, साफ-सफाई और परिसर को स्वच्छ रखने की जरूरत का हवाला दिया गया था। नोटिस में ढाका साउथ सिटी कॉर्पोरेशन के नियमों का भी उल्लेख किया गया। साथ ही बांग्लादेश के पशु वध और मांस गुणवत्ता नियंत्रण कानून, 2011 के तहत निर्धारित बूचड़खानों के बाहर पशु काटने पर लागू कानूनी पाबंदियों की बात कही गई। नियमों का उल्लंघन करने पर जेल या जुर्माने का प्रावधान बताया गया।
विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर डॉ. एमडी आजम खान ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि प्रशासन को कैंपस में पशु काटने की योजना के बारे में जानकारी मिली थी। दुर्गा पूजा के दौरान किसी नए विवाद की स्थिति पैदा न हो, इसलिए छात्रों से ऐसा नहीं करने की अपील की गई थी।
प्रशासन की अपील से नाराज छात्रों के एक समूह ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को गाय काटकर दावत आयोजित करने का ऐलान कर दिया। आयोजन समिति के एक सदस्य ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि छात्र पहले दुर्गा पूजा समाप्त होने के बाद कार्यक्रम करना चाहते थे। लेकिन प्रशासन का नोटिस आने के बाद उन्होंने आयोजन शुक्रवार को ही करने का फैसला किया।
आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम के लिए चंदा इकट्ठा करके एक गाय खरीदी गई है। सोशल मीडिया पर इसमें शामिल होने के लिए 70 टका पंजीकरण शुल्क भी रखा गया। छात्रों ने यह भी बताया कि गाय काटने का कार्यक्रम मंदिर के सामने करने के बजाय आर्ट्स बिल्डिंग के पास खुले मैदान में आयोजित किया जा सकता है।
छात्रों के विरोध के बाद...
छात्रों के विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने दूसरा नोटिस जारी करके अपनी स्थिति स्पष्ट की। इसमें बताया गया कि 12 अक्टूबर को खिचड़ी बनाने को लेकर पैदा हुआ विवाद प्रॉक्टर के हस्तक्षेप से उसी दिन सुलझा लिया गया था। अगले दिन संबंधित पक्षों के बीच बातचीत के बाद भी मामला निपट गया था।
प्रशासन ने कहा कि पशु वध से बचने की अपील धार्मिक तनाव को बढ़ने से रोकने के उद्देश्य से की गई थी। हालांकि, इस नोटिस से गलतफहमी पैदा हुई, जिसके लिए प्रशासन ने खेद जताया। नए नोटिस में कहा गया कि छात्रों को कैंपस में पशु वध सहित कार्यक्रम आयोजित करने का अधिकार है, लेकिन किसी आयोजन से दूसरे लोगों की धार्मिक गतिविधियों में रुकावट नहीं आनी चाहिए।
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