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बांग्लादेश में 2024 छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में 68 को सजा, 22 को फांसी

SHIDDHANT
15 Sept 2026 11:34 PM IST
बांग्लादेश में 2024 छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में 68 को सजा, 22 को फांसी
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बांग्लादेश में 22 लोगों को मौत की सजा
Delhi दिल्ली। बांग्लादेश में जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान कथित हत्या, उकसावे, हिंसा भड़काने और साजिश से जुड़े मामलों में इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) ने अब तक 68 लोगों को दोषी ठहराकर सजा सुनाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें 22 लोगों को मौत की सजा दी गई है। मंगलवार को आए ताजा फैसले में अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर समेत सात लोगों को मौत की सजा सुनाई गई। रिपोर्ट के अनुसार, मौत की सजा पाने वाले 22 दोषियों में से 18 फरार बताए जा रहे हैं, जबकि चार हिरासत में हैं। दोषियों में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल, अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता और पुलिस अधिकारी शामिल बताए गए हैं।
मौत की सजा पाने वालों में 11 लोग अवामी लीग या उससे जुड़े संगठनों से संबंधित बताए गए हैं, जबकि अन्य 11 पुलिस अधिकारी हैं। शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को पिछले साल 17 नवंबर को मौत की सजा सुनाए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है। दोनों के खिलाफ उनकी गैर-मौजूदगी में मुकदमा चलाया गया था। वहीं, पूर्व आईजीपी चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून सरकारी गवाह बने थे और उन्हें पांच साल जेल की सजा सुनाई गई। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि दोषी ठहराए गए लोगों में ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के कई पूर्व वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। इसके अलावा पांच अन्य पुलिस अधिकारियों को तीन से छह साल तक की जेल की सजा सुनाए जाने की जानकारी है।
बांग्लादेश में 2024 का छात्र आंदोलन शुरुआत में सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था के विरोध से जुड़ा था, लेकिन बाद में यह व्यापक सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गया। देशभर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए और सुरक्षा बलों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगे। हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अगस्त 2024 में पद छोड़ दिया और भारत चली गईं।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की फरवरी 2025 की रिपोर्ट में जुलाई-अगस्त 2024 की हिंसा में करीब 1,400 लोगों के मारे जाने का अनुमान लगाया गया था। आंदोलन के बाद बांग्लादेश की राजनीति में बड़े बदलाव हुए और हसीना तथा उनकी सरकार के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई। बांग्लादेश का इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल एक घरेलू न्यायाधिकरण है। इसकी स्थापना मूल रूप से 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान हुए युद्ध अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए की गई थी। 2024 के आंदोलन के बाद इसके कानून में संशोधन कर कथित मानवता-विरोधी अपराधों से जुड़े नए मामलों की सुनवाई का रास्ता तैयार किया गया।
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