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अयोध्या में इतिहास रचता दीपोत्सव: 28 लाख दीपों से जगमगाई रामनगरी, बना वर्ल्ड रिकॉर्ड

Shantanu Roy
19 Oct 2025 6:30 PM IST
अयोध्या में इतिहास रचता दीपोत्सव: 28 लाख दीपों से जगमगाई रामनगरी, बना वर्ल्ड रिकॉर्ड
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Ayodhya. अयोध्या। पावन नगरी अयोध्या एक बार फिर दिव्यता और भक्ति की आलोकधारा में नहाई नजर आई। अवसर था नौवें दीपोत्सव का, जब सरयू तट पर बने 56 घाटों पर लाखों दीपों की रौशनी ने रात को दिन में बदल दिया। इस बार दीपोत्सव ने एक नया इतिहास रच दिया। राम की पैड़ी समेत पूरे सरयू तट पर 28 लाख से अधिक दीप जलाए गए, जिनमें से 26 लाख 11 हजार 101 दीपों को एक साथ प्रज्ज्वलित कर विश्व रिकॉर्ड बनाया गया। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम खुद अयोध्या पहुंची थी और इस ऐतिहासिक क्षण की गवाह बनी। अयोध्या की पवित्र भूमि पर जब लाखों दीप एक साथ जले, तो पूरा शहर सुनहरी रोशनी से नहा उठा और आसमान में भी दिव्यता का दृश्य झिलमिलाने लगा।


दीपोत्सव के मुख्य समारोह से पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या पहुंचे। उन्होंने पुष्पक विमान रूपी हेलीकॉप्टर से राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान के स्वरूपों की अगवानी की। यह क्षण अयोध्या की धार्मिक विरासत को पुनः जीवित करने जैसा था। हेलीपैड से लेकर रामकथा पार्क तक पुष्प वर्षा होती रही। हजारों श्रद्धालु भगवान श्रीराम के जयघोष में डूबे रहे। मंच पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्वयं श्रीराम का राजतिलक किया, जिसके साथ ही रामकथा पार्क “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा। उन्होंने श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और गुरु वशिष्ठ को तिलक कर माल्यार्पण किया और आरती उतारी। मंच पर उपस्थित जनसमूह उस क्षण को देखकर अभिभूत हो उठा, मानो त्रेता युग की पुनरावृत्ति हो रही हो।


राज्याभिषेक समारोह के साथ-साथ राम जानकी वंदना और भरत मिलाप का भी भव्य मंचन हुआ। पूरी रामनगरी श्रद्धा, प्रेम और प्रकाश से सराबोर थी। रामकथा पार्क में जहां श्रीराम राज्याभिषेक का दृश्य जीवंत हुआ, वहीं सरयू तट पर दीपों की श्रृंखला अनंत तक फैली नजर आई। हर घाट, हर दीया, हर लौ जैसे भगवान राम के आगमन का स्वागत कर रही थी। राम की पैड़ी और आसपास के घाटों को फूलों, रांगोली और पारंपरिक सजावट से सजाया गया था। दीपोत्सव के इस आयोजन में राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के 32,000 स्वयंसेवकों ने मुख्य भूमिका निभाई। इन स्वयंसेवकों ने महज 15 मिनट के भीतर 28 लाख दीपों को प्रज्ज्वलित कर दिया। यह नजारा अद्भुत था। सरयू किनारे एक साथ लाखों दीये जब जले, तो ऐसा लगा मानो स्वयं गगन भी इस दिव्यता में झिलमिला उठा हो। गिनीज टीम ने दीपों की गिनती और सत्यापन किया और अंततः 26 लाख 11 हजार 101 दीपों के जलने का रिकॉर्ड दर्ज किया गया।


कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम की पैड़ी पर मां सरयू की आरती उतारी। हजारों श्रद्धालु आरती में सम्मिलित हुए। लहरों पर झिलमिलाते दीप जैसे भक्तों की आस्था का प्रतीक बन गए। सरयू तट की रेत पर, घाटों की सीढ़ियों पर और हवा में लहराते झंडों के बीच भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। दीप प्रज्ज्वलन के बाद लेजर एंड लाइट शो ने सभी का मन मोह लिया। शो में भगवान श्रीराम के जीवन, वनवास, रावण वध और अयोध्या वापसी की कथा को रंगीन किरणों और संगीत के साथ प्रस्तुत किया गया। आसमान में उभरते रामायण के दृश्य दर्शकों को भावविभोर कर गए। सरयू का पानी दीपों और लेजर लाइट की छाया से इंद्रधनुषी रंगों में रंग गया।


दीपोत्सव के दौरान पूरे अयोध्या में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस, PAC, NDRF और स्थानीय प्रशासन की टीमों ने पूरी व्यवस्था को संभाला। बावजूद इसके श्रद्धालुओं की भीड़ में अनुशासन और श्रद्धा दोनों की मिसाल देखने को मिली। घाटों पर उपस्थित हजारों परिवारों ने अपने हाथों से दीप जलाए और भगवान राम से समृद्धि और शांति की कामना की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव के बाद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पहुंचकर रामलला के दर्शन किए। उन्होंने राज्य और देश के कल्याण की कामना की। उन्होंने कहा कि यह दीपोत्सव केवल रोशनी का पर्व नहीं, बल्कि रामराज्य की संकल्पना का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अयोध्या आज दुनिया के आध्यात्मिक नक्शे पर फिर से चमक रही है, और यह केवल उत्सव नहीं बल्कि युग परिवर्तन का संकेत है।


दीपोत्सव के अवसर पर अयोध्या की गलियां, घर, मंदिर और महलों में दीपमालाएं सजी रहीं। हर घर में दीपक जलाए गए और पूरे शहर में ऐसा दृश्य बना मानो धरती पर सितारे उतर आए हों। दुकानों, सड़कों और भवनों को रंगीन झालरों से सजाया गया। कलाकारों ने लोकनृत्य और संगीत प्रस्तुतियां दीं। इस वर्ष के दीपोत्सव को विशेष रूप से पर्यावरण अनुकूल भी रखा गया। सभी दीप मिट्टी के थे, और प्रशासन ने लोगों से अपील की कि वे प्लास्टिक या रासायनिक सजावट का उपयोग न करें। इस पहल ने पूरे आयोजन को सांस्कृतिक और
पर्यावरणीय
दृष्टि से और अधिक सार्थक बना दिया। नौवें दीपोत्सव के साथ अयोध्या ने एक बार फिर विश्व को यह संदेश दिया कि जहां राम का नाम है, वहां प्रकाश है। सरयू तट से उठती दीपों की लहरें केवल रोशनी नहीं, बल्कि आस्था, एकता और शांति का प्रतीक थीं। अयोध्या की धरती ने यह सिद्ध कर दिया कि भक्ति और संगठन की शक्ति से हर असंभव संभव किया जा सकता है। रात ढलने लगी, पर दीपों की ज्योति अयोध्या के आसमान में अब भी चमक रही थी। यह संदेश देते हुए कि प्रभु श्रीराम की नगरी सदा प्रकाशमान रहेगी।
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