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अविमुक्तेश्वरानंद ने CM योगी को फिर घेरा, खुद को बताया निडर

Nilmani Pal
3 May 2026 3:04 PM IST
अविमुक्तेश्वरानंद ने CM योगी को फिर घेरा, खुद को बताया निडर
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यूपी। गोरखपुर से रविवार को गोविष्टि यात्रा का शुभारंभ हुआ. भारत माता मंदिर, सहारा स्टेट के सामने आयोजित कार्यक्रम में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने इस यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में न केवल धार्मिक मुद्दों को उठाया, बल्कि सरकार, राजनीति, वोट बैंक और सामाजिक मानसिकता पर भी तीखे सवाल खड़े किए. उनके भाषण में आक्रोश, आह्वान और आंदोलन की स्पष्ट झलक देखने को मिली.

शंकराचार्य ने अपने संबोधन की शुरुआत एक गंभीर आरोप से की. उन्होंने कहा कि गोविष्टि यात्रा शुरू करने से पहले उन्हें कई तरह की धमकियां मिलीं. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे किसी भी प्रकार के डर से पीछे हटने वाले नहीं हैं. उनका कहना था कि “किसी के माई के लाल में हिम्मत नहीं है कि हमें मरवा दे. अगर कोई पार्टी ऐसा करने की कोशिश करेगी, तो वह सत्ता से बेदखल हो जाएगी.” उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें डराने का प्रयास इसलिए किया जा रहा है क्योंकि वे जनता की वास्तविक भावनाओं और मुद्दों को सामने ला रहे हैं. उनके अनुसार, गोरखपुर की जनता निडर है और वह सच्चाई के साथ खड़ी है, लेकिन कुछ शक्तियां इस आवाज को दबाना चाहती हैं.

गोविष्टि यात्रा को लेकर उन्होंने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य देश में गाय की रक्षा और उसके सम्मान को लेकर जनजागरणकरना है. उन्होंने कहा कि गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का आधार है. “गाय को माता कहकर पुकारते हैं, लेकिन व्यवहार में उसके साथ वैसा सम्मान नहीं दिया जा रहा है,”. उन्होंने जोर देकर कहा कि गाय के प्रति केवल भावनात्मक जुड़ाव पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी सुरक्षा और सम्मान के लिए ठोस कदम उठाने होंगे. इस यात्रा के माध्यम से वे गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेंगे और गोरक्षा को जनआंदोलन बनाने की कोशिश करेंगे.

अपने भाषण में शंकराचार्य ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में हिंदू हितों की प्रतिनिधि होती, तो अब तक गोमाता की रक्षा के लिए ठोस और प्रभावी नीतियां लागू हो चुकी होतीं. उन्होंने सवाल उठाया कि “अगर अन्य देशों में वहां के धार्मिक समुदायों की बात सुनी जाती है, तो भारत में गोमाता की रक्षा की मांग क्यों नहीं सुनी जाती?” उन्होंने यह भी कहा कि इससे यह संकेत मिलता है कि देश में न तो हिंदू राष्ट्र की अवधारणा लागू है और न ही सत्ता में बैठी पार्टी पूरी तरह हिंदू हितों के प्रति प्रतिबद्ध है. शंकराचार्य ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री गाय की रक्षा के मुद्दे पर अपेक्षित दृढ़ता नहीं दिखा पा रहे हैं. उनके अनुसार यदि नेतृत्व में साहस होता, तो बिना किसी दबाव के गोमाता को “राज्यमाता” घोषित किया जा सकता था.

उन्होंने कहा, “अगर मुख्यमंत्री में इच्छाशक्ति होती, तो वे केंद्र की परवाह किए बिना यह निर्णय ले सकते थे. लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है, क्योंकि वोट बैंक की राजनीति हावी है.” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार मुस्लिम और अन्य समुदायों के वोटों को खोने के डर से गोरक्षा जैसे मुद्दों पर सख्त निर्णय नहीं लेती.

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