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अश्विनी वैष्णव बोले: DPDP कानून से नहीं घटेगी पत्रकारिता की आजादी

Tara Tandi
28 Oct 2026 5:36 PM IST
अश्विनी वैष्णव बोले: DPDP कानून से नहीं घटेगी पत्रकारिता की आजादी
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नई दिल्ली: केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि 'डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2023' पत्रकारों की आज़ादी की पूरी सुरक्षा करता है। इसमें ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो मीडिया की स्वतंत्र रूप से रिपोर्ट करने की क्षमता को कमज़ोर करे।
उनका यह बयान तब आया है जब 'डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स एसोसिएशन' (DNPA) ने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनका तर्क है कि पत्रकारिता के लिए कोई छूट न होने से समाचार जुटाने के काम में बाधा आ सकती है और नागरिकों के सूचना पाने के अधिकार कमज़ोर हो सकते हैं। वैष्णव ने कहा, "आज़ादी को प्रभावित करने का कोई इरादा ही नहीं है। यह प्राइवेसी कानून पूरी तरह से आज़ादी को बनाए रखता है। इसे सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद लाया गया है, जिसमें निजता (प्राइवेसी) को एक मौलिक अधिकार माना गया था।"
मंत्री ने बताया कि यह कानून सुप्रीम कोर्ट के प्राइवेसी से जुड़े फैसले के आधार पर तैयार किया गया है और इसे बनाने से पहले व्यापक स्तर पर लोगों से राय ली गई थी। उन्होंने कहा, "यह परामर्श प्रक्रिया एक महीने तक चली, जिसमें इंडस्ट्री भी शामिल थी। यह कानून कहीं भी पत्रकारों की आज़ादी का उल्लंघन नहीं करता है।" मीडिया संगठनों की चिंताओं को खारिज करते हुए, वैष्णव ने स्पष्ट किया कि इस कानून के तहत पत्रकारों को किसी व्यक्ति पर रिपोर्ट करने से पहले उनसे अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं है, और न ही उन्हें अपने न्यूज़ सोर्स (खबर के स्रोत) का खुलासा करने के लिए मजबूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके तहत किसी रिपोर्टर को उस व्यक्ति से अनुमति लेनी पड़े, जिस पर वह स्टोरी कर रहा है। साथ ही, इसमें ऐसा कोई क्लॉज़ भी नहीं है जो स्टोरी के स्रोत का खुलासा करने के लिए बाध्य करे।"
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने DNPA की एक याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। DNPA 21 प्रमुख न्यूज़ संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है। एसोसिएशन का तर्क है कि पत्रकारिता से जुड़े कामों के लिए इस कानून में कोई विशेष छूट न होने से खोजी पत्रकारिता (इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग) और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता पर बुरा असर पड़ सकता है। अगस्त 2023 में संसद द्वारा पारित 'DPDP एक्ट', डिजिटल पर्सनल डेटा की सुरक्षा से जुड़ा भारत का पहला व्यापक कानून है। यह कानून व्यक्तियों की सहमति से, या एक्ट की धारा 7 में बताए गए कुछ "वैध उपयोगों" (legitimate uses) के तहत पर्सनल डेटा को प्रोसेस करने की अनुमति देता है।
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