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असदुद्दीन ओवैसी का सीमांचल के विकास के लिए नीतीश कुमार सरकार को समर्थन
Shantanu Roy
22 Nov 2025 6:23 PM IST

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Hyderabad. हैदराबाद। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार के सीमांचल क्षेत्र के विकास और कल्याण को लेकर अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी नीतीश कुमार की सरकार को समर्थन देने के लिए तैयार है, लेकिन इसके साथ उन्होंने एक स्पष्ट शर्त रखी है। ओवैसी ने कहा कि सीमांचल क्षेत्र दशकों से उपेक्षा और असमान विकास का शिकार रहा है और अब इस स्थिति में सुधार होना चाहिए।
असदुद्दीन ओवैसी ने यह बात बिहार के आमौर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा में कही। उन्होंने सीमांचल के लोगों की समस्याओं को उजागर करते हुए कहा कि पटना और राजगीर तक विकास केंद्रित न रहकर अब राज्य के दूरदराज इलाकों जैसे सीमांचल में भी न्यायपूर्ण और संतुलित विकास होना चाहिए। ओवैसी ने कहा, “हम नीतीश कुमार की सरकार को समर्थन देने को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए सीमांचल के इलाके को उसका न्याय और अधिकार मिलना चाहिए। केवल शहरों तक विकास सीमित नहीं रहना चाहिए।”
ओवैसी ने इस क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक समस्याओं को भी विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि सीमांचल क्षेत्र पलायन, भ्रष्टाचार और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने साफ कहा कि उनका मकसद केवल राजनीतिक समर्थन देना नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय विकास और लोगों के कल्याण की गारंटी देना है।
इस मौके पर ओवैसी ने अपने पांचों विधायकों के जिम्मेदारी और पारदर्शिता के नियम का भी एलान किया। उन्होंने कहा कि उनके विधायक हफ्ते में दो दिन अपने-अपने कार्यालयों में रहेंगे और अपनी लाइव लोकेशन उन्हें साझा करेंगे, ताकि किसी भी समय उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। इसके अलावा ओवैसी ने यह भी कहा कि वे हर छह महीने में सीमांचल क्षेत्र का दौरा करेंगे, ताकि इलाके की वास्तविक समस्याओं और जनता की समस्याओं को सीधे तौर पर समझा जा सके।
हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में सीमांचल क्षेत्र में NDA ने कुल 14 सीटें जीती हैं, जबकि AIMIM ने इस बार अपने उम्मीदवारों को पांच सीटों पर जीत दिलाई है। 2020 में भी AIMIM ने इस क्षेत्र में पांच सीटें जीती थीं, लेकिन उस वक्त चार विधायक राजद में शामिल हो गए थे, जिससे पार्टी का प्रभाव सीमांचल में कुछ हद तक कम हुआ था। इस बार की जीत से यह तय हो गया है कि सीमांचल के लोग AIMIM पर भरोसा करते हैं और उनकी पार्टी की स्वीकार्यता इस क्षेत्र में बनी हुई है।
सीमांचल क्षेत्र की विशेषताओं का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि यहां मुस्लिम आबादी अच्छी खासी है, साथ ही इलाके में कोसी नदी बहती है, जिसकी बाढ़ इलाके के विकास और जीवन पर सीधा असर डालती है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण आबादी से घिरा हुआ है और लंबे समय से बुनियादी बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की सुविधाओं से वंचित रहा है। ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी इस क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर प्रयास करेगी और स्थानीय जनता की समस्याओं को विधानसभा और राज्य सरकार तक पहुंचाएगी।
ओवैसी के इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि AIMIM अब केवल राजनीतिक समर्थन देने वाली पार्टी नहीं रह गई है, बल्कि सीमांचल क्षेत्र में स्थायी विकास और जनहित के लिए सक्रिय भूमिका निभाने वाली पार्टी के रूप में सामने आ रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनके विधायक न केवल चुनावी अवधि में बल्कि पूरे कार्यकाल में अपने क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान करेंगे और जनता के साथ नियमित संवाद बनाए रखेंगे।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों की बात करें तो NDA ने राज्य में प्रचंड बहुमत के साथ जीत हासिल की है। वहीं महागठबंधन को अपेक्षित प्रदर्शन नहीं मिला और उसे बेहद कम सीटें ही मिलीं। इसके बाद नीतीश कुमार ने दसवीं बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इस राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में AIMIM का सीमांचल के लिए समर्थन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह कदम न केवल क्षेत्रीय राजनीति में AIMIM की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है, बल्कि बिहार की सत्ता समीकरण में भी इसका असर दिख सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि AIMIM का सीमांचल के विकास को लेकर यह रुख और सक्रिय नीति प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण और विकास केंद्रित रणनीतियों को जन्म दे सकती है। ओवैसी ने स्पष्ट किया है कि उनका मकसद केवल राजनीतिक फायदे का नहीं, बल्कि सीमांचल के लोगों को समान अवसर, बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और क्षेत्रीय न्याय दिलाना है।
इस प्रकार, असदुद्दीन ओवैसी का यह बयान और AIMIM की नई रणनीति सीमांचल क्षेत्र के भविष्य को लेकर उम्मीद और सशक्त राजनीतिक संदेश देती है। आगामी वर्षों में यह देखना रोचक होगा कि कैसे नीतीश कुमार सरकार और AIMIM मिलकर सीमांचल के विकास और जनता के कल्याण को सुनिश्चित करते हैं, और यह क्षेत्र किस हद तक सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बन पाता है।
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