भारत
Army Chief जनरल उपेन्द्र द्विवेदी तीनों मोर्चों की लड़ाई पर बोले
jantaserishta.com
1 Nov 2025 10:09 PM IST

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Delhi दिल्ली। थलसेना प्रमुख (COAS) जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने शनिवार को कहा कि भारत को अब केवल जमीनी युद्ध की नहीं, बल्कि भूमि, आकाश और जल – तीनों क्षेत्रों में एक साथ लड़ने की क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि उभरती सुरक्षा चुनौतियों के दौर में मल्टी-डोमेन ऑपरेशन (Multi-Domain Operations) की अवधारणा भारत की रक्षा नीति का अहम हिस्सा बनती जा रही है। जनरल द्विवेदी ने कहा, “हमें अब केवल पारंपरिक युद्ध की सीमाओं से बाहर जाकर सोचना होगा। आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। हमें भूमि, आकाश और जल – तीनों पर काम करना होगा। इन तीनों क्षेत्रों का संतुलन ही हमारी रणनीतिक बढ़त तय करेगा।”
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन सिस्टम और साइबर डिफेंस जैसे तत्व अब किसी भी सैन्य रणनीति के केंद्र में हैं। “आज का युद्ध केवल सैनिकों की ताकत से नहीं, बल्कि डेटा, तकनीक और सूचनात्मक नियंत्रण से जीता जाता है,” उन्होंने कहा। सेना प्रमुख ने यह भी बताया कि भारतीय थलसेना अपने प्रशिक्षण और युद्ध तैयारी को आधुनिक जरूरतों के अनुसार बदल रही है। “हमने अपने प्रशिक्षण पैटर्न को नई तकनीक से जोड़ा है। अब हर सैनिक को टेक्नोलॉजी-ड्रिवन युद्ध के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है,” जनरल द्विवेदी ने कहा।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियाँ लगातार बदल रही हैं — उत्तरी सीमा पर चीन की गतिविधियों से लेकर पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान की नापाक हरकतें तक — लेकिन भारतीय सेना हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार है। जनरल द्विवेदी ने कहा कि तीनों सेनाओं (थल, नौसेना और वायुसेना) के बीच संयुक्त ऑपरेशनल कमांड की दिशा में भी ठोस प्रगति हो रही है। “यह समय संयुक्तता का है। हमें तीनों सेनाओं की क्षमताओं को जोड़कर एक मजबूत रक्षा तंत्र बनाना है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में एकजुट प्रतिक्रिया दी जा सके,” उन्होंने कहा।
उन्होंने भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता पर भी जोर दिया और कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत देश की रक्षा प्रणाली अब स्वदेशी उपकरणों और तकनीक से सशक्त हो रही है। “हमारा उद्देश्य है कि आने वाले वर्षों में भारतीय सेना पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाए,” उन्होंने कहा। सेना प्रमुख के इस बयान को विशेषज्ञ भारत की भविष्य की रक्षा नीति के लिए रणनीतिक संकेत मान रहे हैं। यह स्पष्ट करता है कि भारत अब पारंपरिक युद्ध नीति से आगे बढ़कर तकनीकी, सूचना और साइबर क्षमताओं को समान प्राथमिकता दे रहा है।
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