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अंकिता भंडारी के माता-पिता को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया, 2 घंटे बाद रिहाई; उत्तराखंड में कांग्रेस करेगी प्रदर्शन
jantaserishta.com
15 Oct 2026 1:45 PM IST

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नई दिल्ली: दिल्ली के इंडिया गेट के पास अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग कर रहे उनके माता-पिता को गुरुवार सुबह पुलिस हिरासत में लिया गया। करीब दो घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के विरोध में उत्तराखंड महिला कांग्रेस प्रदर्शन करेगी। वहीं, परिवार कथित VIP की पहचान और भूमिका पर सवालों के जवाब मांग रहा है। मामले में तीन दोषियों को जून 2025 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे अंकिता के माता-पिता हिरासत में लिए गए
अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर दिल्ली के इंडिया गेट के पास धरने पर बैठे उनके माता-पिता को गुरुवार सुबह पुलिस अपने साथ ले गई। खबर के मुताबिक, पुलिस उन्हें वहां से खींचकर ले गई। इस दौरान अंकिता की मां सोनी देवी रोती हुई नजर आईं।
बताया गया है कि माता-पिता को तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में रखा गया था। करीब दो घंटे बाद सुबह 6 बजे उन्हें रिहा कर दिया गया। उनके साथ मौजूद कुछ कांग्रेस नेताओं को भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है।
परिवार दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद विरोध कर रहा था। इस घटनाक्रम के बाद उत्तराखंड में भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी की गई है।
उत्तराखंड में महिला कांग्रेस करेगी प्रदर्शन
दिल्ली में अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने के बाद उत्तराखंड प्रदेश महिला कांग्रेस ने विरोध जताने का फैसला किया है। संगठन की ओर से गुरुवार को प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान दुष्यंत गौतम का पुतला जलाने और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपने की योजना है।
महिला कांग्रेस ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग करेगी। प्रदर्शन में अंकिता को न्याय दिलाने, कथित VIP की पहचान से जुड़े सवालों का जवाब देने और मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई जाएगी।
कांग्रेस का विरोध दुष्यंत गौतम को राज्यपाल नियुक्त किए जाने को लेकर भी है। पार्टी नेताओं ने अंकिता हत्याकांड से जुड़े सवालों के बीच इस नियुक्ति पर आपत्ति जताई है। हालांकि, दुष्यंत गौतम की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों को साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।
वर्ष 2022 में सामने आया था अंकिता भंडारी हत्याकांड
अंकिता भंडारी पौड़ी जिले के श्रीकोट क्षेत्र की रहने वाली थीं। वह ऋषिकेश के पास स्थित वनतारा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनके लापता होने की खबर सामने आई थी। बाद में जांच के दौरान उनकी हत्या का मामला सामने आया और चीला नहर से उनका शव बरामद किया गया।
इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर तथा अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था। मुकदमे की सुनवाई के बाद जून 2025 में कोटद्वार की अदालत ने तीनों को दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई।
हालांकि, सजा के बाद भी कथित VIP की पहचान और उसकी भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अंकिता के परिवार और सामाजिक संगठनों की मांग है कि इन सवालों पर स्पष्ट जानकारी सामने आए। उनका कहना है कि यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
राहुल और प्रियंका गांधी के पहुंचने से मामला फिर चर्चा में
दिल्ली में अंकिता के माता-पिता के धरने के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के पहुंचने के बाद यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। परिवार लंबे समय से अपनी बेटी को न्याय दिलाने और हत्याकांड से जुड़े बाकी सवालों के जवाब मांग रहा है।
दिल्ली में हुए घटनाक्रम के बाद उत्तराखंड में कांग्रेस ने भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी की है। महिला कांग्रेस के कार्यक्रम में परिवार की मांगों और कथित VIP से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर पहले भी हुआ था विरोध
दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद उत्तराखंड में कांग्रेस ने इससे पहले भी विरोध प्रदर्शन किया था। मंगलवार को देहरादून के गांधी पार्क में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं ने गांधी प्रतिमा के सामने एक घंटे तक मौन उपवास रखा था।
कांग्रेस ने इस कार्यक्रम को कथित VIP से जुड़े सवालों के बीच दुष्यंत गौतम को संवैधानिक पद पर नियुक्त किए जाने के विरोध के रूप में पेश किया। पार्टी की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर नियुक्ति पर सवाल उठाए थे।
दुष्यंत गौतम इससे पहले उत्तराखंड में भाजपा के प्रदेश प्रभारी रह चुके हैं। फिलहाल अंकिता के माता-पिता की मांग है कि हत्याकांड से जुड़े अनुत्तरित सवालों पर स्पष्टता लाई जाए। दिल्ली में हुई हिरासत की घटना के बाद यह मुद्दा एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति और विरोध प्रदर्शनों के केंद्र में आ गया है।
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