भारत

मानवता की मिसाल: 95 वर्षीय रिटायर्ड प्रोफेसर दंपत्ति ने निभाई अपनापन की जिम्मेदारी

Shantanu Roy
20 Feb 2026 7:16 PM IST
मानवता की मिसाल: 95 वर्षीय रिटायर्ड प्रोफेसर दंपत्ति ने निभाई अपनापन की जिम्मेदारी
x
Surat. सूरत। गुजरात के सूरत शहर से इंसानियत और संवेदनशीलता की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने समाज को भावुक कर दिया है। यहां कॉलेज के एक रिटायर्ड प्रोफेसर पति-पत्नी ने अपने घर में वर्षों तक काम करने वाली घरेलू सहायिका के प्रति ऐसा अपनापन दिखाया है, जो आज के दौर में विरल माना जाता है। जानकारी के अनुसार, प्रोफेसर दंपत्ति ने अपने छोटे बच्चों की देखभाल और घरेलू कार्यों के लिए राजू बेन गामीत नामक एक आदिवासी महिला को काम पर रखा था। समय के साथ राजू बेन परिवार का अभिन्न
हिस्सा
बन गईं। उन्होंने पूरे समर्पण और निष्ठा के साथ करीब 50 वर्षों तक दंपत्ति के घर में सेवा दी। परिवार के बच्चों की परवरिश से लेकर घर की जिम्मेदारियों तक, उन्होंने हर भूमिका को पूरी ईमानदारी से निभाया। कुछ वर्षों पहले राजू बेन को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होने लगीं। उम्र और बीमारी के कारण वे काम करने में असमर्थ हो गईं।

बताया जाता है कि उनके अपने बच्चे, जो अब सरकारी नौकरी पाकर जीवन में स्थापित हो चुके हैं, किसी कारणवश अपनी मां की देखभाल करने के लिए तैयार नहीं हुए। इस स्थिति में जहां अक्सर लोग दूरी बना लेते हैं, वहीं प्रोफेसर दंपत्ति ने मानवता का परिचय देते हुए राजू बेन को अकेला नहीं छोड़ा। पिछले पांच वर्षों से यह बुजुर्ग दंपत्ति स्वयं राजू बेन की सेवा और देखभाल कर रहे हैं। विशेष बात यह है कि दंपत्ति की स्वयं की उम्र लगभग 95 वर्ष है, फिर भी उन्होंने अपनी पूर्व सहायिका की जिम्मेदारी को परिवार के सदस्य की तरह निभाया है। उनकी इस
संवेदनशील
पहल ने समाज में एक सकारात्मक संदेश दिया है कि रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि संवेदना और अपनापन से भी बनते हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दंपत्ति की इस पहल की सराहना की है। कई नागरिकों ने इसे सच्ची मानवता की मिसाल बताया है। यह घटना उन मूल्यों की याद दिलाती है, जहां करुणा, कृतज्ञता और जिम्मेदारी को सर्वोपरि माना जाता था। वास्तव में, यह कहानी समाज के लिए एक प्रेरणा है कि इंसानियत और संवेदनशीलता आज भी जीवित हैं, बस उन्हें अपनाने की आवश्यकता है।
Next Story