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अलवर गैंगरेप के 5 आरोपी दोषी करार...थोड़ी देर में होगा सजा का ऐलान

Admin2
6 Oct 2020 6:59 AM GMT
अलवर गैंगरेप के 5 आरोपी दोषी करार...थोड़ी देर में होगा सजा का ऐलान
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राजस्थान के अलवर में हुए गैंगरेप के मामले में चार आरोपियों को कोर्ट ने दोषी माना है. सथी ही वीडियो वायरल करने के आरोपी को आईटी एक्ट में दोषी करार दिया गया है. हंसराज, इंद्राज, अशोक व छोटेलाल को आईपीसी व आईटी एक्ट में दोषी माना गया है, जबकि मुकेश आईटी एक्ट में दोषी माना गया है. एक बजे के बाद सजा पर फैसला आ सकता है. जस्टिस बृजेश कुमार की अदालत में मामले में बचाव पक्ष की अंतिम बहस पिछले महीने 11 सितम्बर को पूरी हो गई थी. तब जस्टिस ने फैसला सुनाने के लिए 24 सितम्बर का दिन मुकर्रर किया था, लेकिन कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए हाई कोर्ट ने 1 अक्टूबर तक कोर्ट में कामकाज पर रोक लगा थी. इसके बाद कोर्ट ने आज अपना फैसला सुनाया.

क्या है पूरा मामला

थानागाजी पुलिस थाने में 2 मई 2019 को मामला दर्ज हुआ था, जिसमे दलित दंपत्ति को बंधक बनाकर पति के सामने ही युवती से गैंगरेप घटना को 5 लोगों द्वारा अंजाम दिया गया था और इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था. इस मामले में पुलिस ने 5 लोगों के खिलाफ गैंगरेप के मामले में चालान पेश किया था, जबकि एक आरोपी मुकेश के खिलाफ वीडियो वायरल करने का मामला दर्ज किया था.

पुलिस द्वारा मामला दर्ज नहीं किया गया था, जिसके बाद एसएचओ सहित पूरा स्टाफ, डीएसपी, एएसपी ओर एसपी को राज्य सरकार से हटा दिया था. इसके बाद थानागाजी पुलिस ने 18 मई 2019 को 5 आरोपियों अशोक, इंद्राज, महेश हंसराज और छोटेलाल को गैंगरेप, डकैती, धमकी, अवैध वसूली, एससी-एसटी एक्ट में दोषी मानते हुए चार्जशीट पेश की थी, जबकि मुकेश कुमार पर वीडियो सोसल मीडिया पर वायरल करने का जुर्म प्रमाणित मानते हुए कोर्ट में चालान पेश किया था.

पुलिस की ओर से 3 आरोपियों छोटेलाल, इंद्राज ओर अशोक के खिलाफ 147, 149, 323, 341, 354ख, 376d, 506, 342, 386, 384, 395,327,365IPC, sc-st एक्ट की विभिन्न धाराओं, के अलावा आईटी एक्ट 67, 67A की सभी धाराओं में आरोपियों को दोष प्रमाणित मानते हुए चार्जशीट पेश की गई थी जबकि हंसराज के खिलाफ उसके तीनों साथियों के साथ लगाई गई धाराओं के अतीरिक्त 376 (2)N की अतिरिक्त धारा में चालान किया गया था. पांचवें आरोपी मुकेश के खिलाफ आईटी एक्ट 67, 67A 4/6 महिलाओं का अशिष्ट रूपण प्रतिषेध अधिनियम में चालान पेश किया गया था.

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