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New Delhi. नई दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ‘AI इम्पैक्ट समिट 2026’ को संबोधित करते हुए ग्लोबल साउथ के लिए भारत का व्यापक विजन सामने रखा। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाले पहले वैश्विक AI शिखर सम्मेलन के रूप में भारत एक ऐसा मंच तैयार कर रहा है, जो विकास की प्राथमिकताओं को केंद्र में रखेगा और उन आवाजों को वैश्विक विमर्श में स्थान देगा, जिन्हें अब तक पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। प्रधानमंत्री के वक्तव्य में समावेशन, नवाचार और तकनीकी संप्रभुता पर विशेष जोर दिखा।
Speaking at the India-France Innovation Forum in Mumbai. https://t.co/i78YjmvrrL
— Narendra Modi (@narendramodi) February 17, 2026
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपने प्रतिभाशाली युवाओं के हर प्रयास को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नवाचार और समावेशन के लिए एक ‘शक्ति-गुणक’ बन सके। उनके अनुसार, AI केवल तकनीकी प्रगति का उपकरण नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का माध्यम है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और शासन जैसे क्षेत्रों में व्यापक प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि सही नीतिगत दिशा और वैश्विक सहयोग से AI विकासशील देशों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा।
Addressing the joint press meet with President Emmanuel Macron.@EmmanuelMacron https://t.co/FuX0qSUyw7
— Narendra Modi (@narendramodi) February 17, 2026
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की DPI यात्रा ग्लोबल साउथ के देशों के लिए महत्वपूर्ण और व्यावहारिक सबक प्रस्तुत करती है। उन्होंने रेखांकित किया कि डीपीआई और AI का अभिसरण समावेशी विकास का अगला चरण है। इससे सेवाओं की पहुंच, दक्षता और पारदर्शिता में वृद्धि होगी, जिससे नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकेगा। प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत के अनुभव दर्शाते हैं कि मजबूत डिजिटल आधारभूत संरचना AI के प्रभावी और जिम्मेदार उपयोग के लिए आवश्यक है।
‘AI इम्पैक्ट समिट 2026’ की प्रासंगिकता पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह मंच विभिन्न हितधारकों—नीति-निर्माताओं, उद्योग, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं—को एक साथ ला रहा है। साथ ही, AI की सीमाओं, जोखिमों और पूर्वाग्रहों जैसे जटिल मुद्दों पर वैश्विक जागरूकता बढ़ाने में मदद कर रहा है। उन्होंने कहा कि AI में नैतिकता, जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना समय की मांग है, जिसके लिए वैश्विक सहयोग और साझा मानकों की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री ने इतिहास का संदर्भ देते हुए कहा कि जब भी कोई बड़ा नवाचार हुआ है, नए अवसर पैदा हुए हैं, और AI के युग में भी यही सच होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘AI में आत्मनिर्भर भारत’ का अर्थ है कि डिजिटल सदी के लिए भारत अपना खुद का ‘कोड’ लिखे—अर्थात स्वदेशी समाधान, अनुसंधान और क्षमताओं का विकास। यह दृष्टिकोण भारत को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भी बनाएगा।
अपने विजन को समेटते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि AI में आत्मनिर्भर भारत तीन स्तंभों—संप्रभुता, समावेशिता और नवाचार—पर टिका है। संप्रभुता का तात्पर्य डेटा और तकनीकी निर्णयों पर देश की स्वायत्तता से है, समावेशिता का लक्ष्य तकनीक के लाभों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, और नवाचार निरंतर प्रगति का आधार है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भारत का यह मॉडल ग्लोबल साउथ के देशों के लिए प्रेरणा बनेगा और AI के क्षेत्र में सहयोग, विश्वास और साझा समृद्धि को बढ़ावा देगा।
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