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Arabian Sea अरब सागर: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के संकेत एक बार फिर सामने आए हैं। अमेरिकी नौसेना ने अपने एक एयरक्राफ्ट कैरियर की ओर बढ़ रहे एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि ड्रोन को संभावित खतरे के रूप में देखा गया, क्योंकि वह अमेरिकी युद्धपोत के काफी करीब पहुंच रहा था। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तत्काल कार्रवाई की गई और ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, यह ड्रोन ईरान का शहीद-139 था, जिसे अमेरिकी F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट ने निशाना बनाकर मार गिराया। यह घटना ऐसे समय पर हुई है, जब इसी सप्ताह तुर्की में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत शुरू होने वाली है। ऐसे में यह कार्रवाई कूटनीतिक प्रयासों के बीच सैन्य तनाव को और उजागर करती है। अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ड्रोन की गतिविधियों को लगातार मॉनिटर किया जा रहा था। जैसे ही यह एयरक्राफ्ट कैरियर के काफी नजदीक पहुंचा और उसके इरादों को लेकर स्पष्टता नहीं रही, इसे एक संभावित खतरा मानते हुए कार्रवाई की गई। अमेरिकी नौसेना ने इसे आत्मरक्षा के तहत उठाया गया कदम बताया है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
शहीद-139 ड्रोन को ईरान की उन्नत ड्रोन क्षमताओं का हिस्सा माना जाता है। यह ड्रोन लंबी दूरी तक मार करने और विस्फोटक ले जाने की क्षमता के लिए जाना जाता है। हाल के वर्षों में ईरान के ड्रोन कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगी देश लगातार चिंता जताते रहे हैं। खासकर मध्य पूर्व और समुद्री इलाकों में ईरानी ड्रोन गतिविधियों को सुरक्षा के लिहाज से चुनौती माना जाता है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच संबंध पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं। एक ओर जहां परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तनाव को बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं वार्ता प्रक्रिया पर भी असर डाल सकती हैं और दोनों देशों के बीच अविश्वास को और गहरा कर सकती हैं।
फिलहाल, इस ड्रोन को मार गिराए जाने की घटना पर ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, इससे पहले भी ईरान अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों को उकसावे की कार्रवाई बता चुका है। मध्य पूर्व और अरब सागर क्षेत्र पहले से ही वैश्विक रणनीतिक महत्व का क्षेत्र माना जाता है। यहां होने वाली किसी भी सैन्य घटना का असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। ऐसे में अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी ड्रोन को मार गिराने की यह घटना न सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा, बल्कि वैश्विक कूटनीति के लिहाज से भी बेहद अहम मानी जा रही है।
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