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दिल्ली: गूगल और माइक्रोसॉफ्ट के बाद अब फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा ने भी खर्च कम करने के लिए कदम उठाए हैं। कंपनी फ्रांस में अपने कुछ कर्मचारियों को स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने का विकल्प दे रही है। फ्रांसीसी मीडिया संस्थान ला लेत्रे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना के तहत नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों को आर्थिक मुआवजा देने के साथ आगे के करियर के लिए ट्रेनिंग और अपना कारोबार शुरू करने में सहायता भी दी जाएगी।
यह पेशकश ऐसे समय आई है, जब मेटा पहले ही अलग-अलग चरणों में हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी है। हालांकि, इस बार कंपनी की योजना जबरन नौकरी से निकालने की नहीं, बल्कि कर्मचारियों को अपनी इच्छा से कंपनी छोड़ने का विकल्प देने की है।
फ्रांस के करीब 100 कर्मचारी हो सकते हैं प्रभावित
रिपोर्ट के अनुसार, मेटा के फ्रांस कार्यालय में इस समय लगभग 300 कर्मचारी काम करते हैं। कंपनी की नई योजना से इनमें से करीब 100 कर्मचारियों के प्रभावित होने की संभावना जताई गई है। यानी हर तीन में से एक कर्मचारी इस प्रस्ताव के दायरे में आ सकता है।
हालांकि, मेटा ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि कितने कर्मचारी इस विकल्प को चुनेंगे। यह जानकारी भी सामने नहीं आई है कि कंपनी किन विभागों या पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों को इस योजना में शामिल कर रही है। इस ऑफर का लाभ लेने के इच्छुक कर्मचारियों के लिए 5 नवंबर तक आवेदन करने की समयसीमा तय की गई है।
क्या है मेटा का वॉलंटरी एग्जिट प्लान?
मेटा फ्रांस में कर्मचारियों की स्वैच्छिक विदाई के लिए वहां के श्रम कानून के तहत एक विशेष प्रक्रिया अपना रही है। इसे RCC यानी सामूहिक सहमति से रोजगार समाप्त करने की व्यवस्था कहा जाता है। इसमें कंपनी और कर्मचारियों के प्रतिनिधियों या यूनियन के बीच बातचीत के जरिए नौकरी छोड़ने की शर्तें तय की जाती हैं।
शर्तों पर सहमति बनने के बाद कर्मचारी अपनी मर्जी से इस योजना में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस तरह यह सामान्य छंटनी से अलग प्रक्रिया है, जिसमें कंपनी सीधे कर्मचारियों को नौकरी से हटाने का फैसला करती है।
हर साल की नौकरी पर 2.15 महीने की सैलरी का मुआवजा
इस योजना के तहत नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों को उनके कंपनी में काम करने के कुल समय के आधार पर आर्थिक पैकेज मिलेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, हर एक साल की सेवा के बदले 2.15 महीने की सैलरी के बराबर मुआवजा दिया जाएगा।
उदाहरण के तौर पर, अगर किसी कर्मचारी ने मेटा में पांच साल काम किया है, तो उसे करीब 10.75 महीने की सैलरी के बराबर भुगतान मिल सकता है। हालांकि, इस पैकेज की गणना ग्रॉस सैलरी के 80 प्रतिशत के आधार पर की जाएगी। इसका मतलब है कि कर्मचारी को नौकरी छोड़ने के बाद एकमुश्त आर्थिक सहायता मिलेगी, जिससे उसे नई नौकरी तलाशने या अपना अगला करियर विकल्प चुनने के दौरान कुछ समय तक आर्थिक सहारा मिल सकेगा।
नई स्किल सीखने और बिजनेस शुरू करने में भी सहायता
मेटा का प्रस्ताव केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है। कंपनी नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों को नई क्षमताएं विकसित करने के लिए ट्रेनिंग देने की भी योजना बना रही है। इसके अलावा, जो कर्मचारी अपना कारोबार या स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं, उन्हें मार्गदर्शन और जरूरी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
इस तरह कंपनी कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के बाद दूसरे पेशे में जाने या खुद का काम शुरू करने के लिए तैयार करने की कोशिश कर रही है।
AI पर बढ़ते निवेश के बीच टेक कंपनियां घटा रहीं खर्च
दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां इन दिनों अपने खर्च और कर्मचारियों की संख्या की समीक्षा कर रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI में निवेश बढ़ने के साथ कंपनियां अपने संसाधनों को नई तकनीक और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित कर रही हैं।
मेटा से पहले गूगल और माइक्रोसॉफ्ट भी कुछ देशों में कर्मचारियों को स्वैच्छिक रूप से नौकरी छोड़ने के बदले आर्थिक पैकेज देने के विकल्प दे चुकी हैं। मेटा भी पिछले दो वर्षों में कई चरणों में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी है। फ्रांस में शुरू की गई नई योजना इसी व्यापक कॉस्ट कटिंग प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा रही है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इस ऑफर के तहत कर्मचारियों की अंतिम संख्या या विभागवार विवरण सार्वजनिक नहीं किया है।
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