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खाटू श्याम मंदिर पर चला प्रशासन का बुलडोजर, 15 गांवों की आस्था पर उठा सवाल

jantaserishta.com
26 Aug 2026 12:45 PM IST
खाटू श्याम मंदिर पर चला प्रशासन का बुलडोजर, 15 गांवों की आस्था पर उठा सवाल
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सांकेतिक तस्वीर

100 से अधिक पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हटाया निर्माण.
राजगढ़: राजगढ़ जिले की ब्यावरा तहसील के लखनवास क्षेत्र में बड़ली माता मंदिर की पहाड़ी पर बन रहे खाटू श्याम मंदिर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासन ने जेसीबी की मदद से करीब 2 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में चल रहे निर्माण को हटा दिया। कार्रवाई के दौरान मौके पर 100 से अधिक पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अमला मौजूद रहा। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच तनाव की स्थिति बन गई। ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर मंदिर का निर्माण किया जा रहा था, वह आसपास के करीब 15 गांवों के लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ था। ग्रामीणों के अनुसार, मंदिर निर्माण के लिए किसी एक व्यक्ति ने नहीं, बल्कि कई गांवों के लोगों ने मिलकर चंदा जुटाया था।
उनका कहना है कि मंदिर निर्माण का काम ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी से शुरू किया गया था। कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने निर्माण को पूरी तरह हटा दिया, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।
15 गांवों के लोगों ने चंदा जुटाकर शुरू कराया था निर्माण
ग्रामीणों के मुताबिक बड़ली माता पहाड़ी पर खाटू श्याम मंदिर बनाने की पहल आसपास के करीब 15 गांवों के लोगों ने की थी। इसके लिए ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा किया और निर्माण कार्य शुरू कराया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने निर्माण हटाने से पहले उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं दी। उनका कहना है कि उन्हें न तो कार्रवाई से पहले नोटिस मिला और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर उनके लिए केवल एक निर्माण नहीं था, बल्कि उनकी धार्मिक आस्था और सामूहिक प्रयास से जुड़ा केंद्र था। ऐसे में प्रशासन की कार्रवाई से लोगों की भावनाएं प्रभावित हुई हैं। हालांकि, प्रशासन ने ग्रामीणों के इस दावे को अलग तरीके से बताया है। अधिकारियों का कहना है कि जिस जमीन पर निर्माण किया जा रहा था, वह सरकारी जमीन है और वहां अतिक्रमण किया गया था।
ग्रामीणों ने लगाए क्रेशर और अवैध खनन के आरोप
मंदिर हटाए जाने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उनका दावा है कि पहाड़ी क्षेत्र में क्रेशर मशीन लगाने और अवैध खनन को बढ़ावा देने के लिए रास्ता साफ करने की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से अवैध खनन और ब्लास्टिंग को लेकर शिकायतें की जाती रही हैं। उनका आरोप है कि इन शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई, लेकिन मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई करते हुए निर्माण हटा दिया। ग्रामीणों ने इसी वजह से प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि जमीन पर किसी तरह का अतिक्रमण था तो पहले उन्हें इसकी जानकारी देकर प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए थी।
हालांकि, ग्रामीणों की ओर से लगाए गए क्रेशर मशीन और अवैध खनन को लेकर आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी में नहीं है।
तहसीलदार बोले- सरकारी जमीन से हटाया अतिक्रमण
दूसरी ओर प्रशासन ने ग्रामीणों के आरोपों को खारिज किया है। ब्यावरा के तहसीलदार रामनिवास धाकड़ ने कहा कि कार्रवाई सरकारी जमीन से अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए की गई है।
तहसीलदार के मुताबिक, कार्रवाई अचानक या बिना प्रक्रिया के नहीं की गई। उन्होंने बताया कि संबंधित पक्ष को नियमों के तहत पहले ही नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए निर्माण हटाने की कार्रवाई की गई। प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह के अतिक्रमण को स्वीकार नहीं किया जाएगा और नियमों के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
इस मामले में एक तरफ ग्रामीण मंदिर को अपनी सामूहिक आस्था का केंद्र बताते हुए कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासन इसे सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की सामान्य कार्रवाई बता रहा है। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए अवैध खनन और क्रेशर से जुड़े आरोपों पर प्रशासन की ओर से अलग से कोई पुष्टि नहीं की गई है।
फिलहाल बड़ली माता पहाड़ी पर हुई इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में प्रशासन और ग्रामीणों के बीच मतभेद सामने आ गए हैं। मंदिर निर्माण से जुड़े ग्रामीण प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि प्रशासन अपने कदम को नियमों के अनुरूप बता रहा है।
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