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एक्टर ऋतिक रोशन पर भ्रामक विज्ञापन का मामला, कन्ज्यूमर कोर्ट में जवाब पेश

Shantanu Roy
13 March 2026 2:44 PM IST
एक्टर ऋतिक रोशन पर भ्रामक विज्ञापन का मामला, कन्ज्यूमर कोर्ट में जवाब पेश
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बड़ी खबर
Jhalawar. झालावाड़। राजस्थान के कन्ज्यूमर कोर्ट, झालावाड़ में एक भ्रामक विज्ञापन से जुड़े मामले में बॉलीवुड सुपरस्टार ऋतिक रोशन और कोल्ड ड्रिंक्स निर्माता कंपनी माउंटेन ड्यू ने जवाब पेश किया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 10 अप्रैल को रखी गई है। कन्ज्यूमर कोर्ट ने ऋतिक रोशन और माउंटेन ड्यू निर्माता कंपनी को 12 फरवरी को नोटिस जारी किया था। यह नोटिस कोर्ट ने तथ्यों की जांच के बाद जारी किया था। इसके बाद 3 अलग-अलग नोटिस जारी किए गए, जिनके जवाब 12 मार्च को कोर्ट में पेश किए गए।
वकीलों द्वारा जवाब पेश
दिल्ली और झालावाड़ के वकीलों ने 3 अलग-अलग नोटिस के मामले में ऋतिक रोशन और संबंधित कंपनियों की ओर से जवाब पेश किया। कोर्ट ने इस जवाब को नोट किया और अगली सुनवाई की तारीख 10 अप्रैल निर्धारित की।
शिकायत और विज्ञापन पर रोक की मांग
झालावाड़ निवासी एडवोकेट गुरुचरण सिंह ने 20 जनवरी को कन्ज्यूमर कोर्ट में परिवाद पेश किया था। इसके बाद 12 फरवरी को कोर्ट ने तीन नोटिस जारी किए। शिकायत में उन्होंने यह मांग की कि जब तक मामला विचाराधीन है, इस कोल्ड ड्रिंक के विज्ञापन पर रोक लगाई जाए। एडवोकेट गुरुचरण सिंह का कहना है कि यह विज्ञापन पूरी तरह से भ्रामक है और सच्चाई से परे है। विज्ञापन में दावा किया जाता है कि इस कोल्ड ड्रिंक को पीने से शरीर में अत्यधिक स्फूर्ति और ऊर्जा (एनर्जी) आती है और व्यक्ति असंभव लगने वाले साहसी काम भी आसानी से कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऋतिक रोशन और कोल्ड ड्रिंक निर्माता कंपनी ने मिलकर उपभोक्ताओं को गुमराह किया।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत मामला
एडवोकेट गुरुचरण सिंह ने उपभोक्ता न्यायालय में तर्क दिया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत किसी भी ऐसे विज्ञापन को भ्रामक माना जाता है जो किसी उत्पाद की गुणवत्ता, प्रकृति या लाभ के बारे में गलत जानकारी देता है। उन्होंने बताया कि इस भ्रामक विज्ञापन के चलते उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हैं और उन्हें वास्तविक उत्पाद की जानकारी नहीं मिल पा रही है। इस कारण उन्होंने कोर्ट में परिवाद दर्ज कराया।
न्यायालय की प्रारंभिक जांच
कन्ज्यूमर कोर्ट के सदस्य वीरेंद्र सिंह रावत ने मामले की प्रारंभिक जांच की और शिकायत में दिए गए तर्कों को सही पाया। कोर्ट ने मामले को विचारार्थ स्वीकार किया और सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब देने के लिए कहा। न्यायालय ने नोटिस में कहा कि ऋतिक रोशन, माउंटेन ड्यू निर्माता कंपनी और संबंधित बेवरेज कंपनी को अदालत में पेश होकर स्पष्ट जवाब देना होगा। कोर्ट ने मामला गंभीरता से लेते हुए सभी पक्षों को अपने-अपने प्रमाण और दलीलें प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
बॉलीवुड और विज्ञापन उद्योग पर असर
इस मामले से बॉलीवुड स्टार्स और विज्ञापन उद्योग में एक बड़ा सन्देश गया है कि भ्रामक विज्ञापन उपभोक्ता कानून के दायरे में आता है और यदि किसी भी सेलिब्रिटी या कंपनी ने उपभोक्ताओं को गुमराह किया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इस प्रकार के मामलों में न्यायालय की निगरानी महत्वपूर्ण है ताकि उपभोक्ताओं को सही और सटीक जानकारी मिल सके। बॉलीवुड स्टार्स के ब्रांड एंबेस्डर होने के नाते उनके प्रचारित उत्पादों का प्रभाव व्यापक होता है, इसलिए यह जिम्मेदारी बनती है कि विज्ञापन सटीक और सत्यापित हो।
विज्ञापन पर रोक और उपभोक्ता अधिकार
शिकायतकर्ता एडवोकेट गुरुचरण सिंह ने कोर्ट से आग्रह किया कि जब तक मामला विचाराधीन है, विज्ञापन पर रोक लगाई जाए। उन्होंने बताया कि विज्ञापन के कारण उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हैं और उन्हें उत्पाद के वास्तविक लाभ के बारे में भ्रमित किया जा रहा है। कोर्ट ने यह मामला गंभीरता से लिया है और सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया। अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी, जिसमें अदालत सभी प्रमाण और तर्कों की जांच करेगी।
कोर्ट प्रक्रिया और कानूनी दलीलें
कोर्ट में पेश किए गए जवाब में दिल्ली और झालावाड़ के वकीलों ने तीन अलग-अलग नोटिस के मामले में तर्क दिए। अदालत ने इन दलीलों को नोट किया और अगली सुनवाई के लिए सभी पक्षों को उपस्थित रहने का निर्देश दिया। कोर्ट के आदेश के अनुसार, मामला तब तक विचाराधीन रहेगा जब तक सभी पक्षों की दलीलें और प्रमाण प्रस्तुत नहीं हो जाते। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि कोई भी पक्ष इस दौरान विज्ञापन को बदले या प्रसारित न करे।
उपभोक्ताओं की सुरक्षा और चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को भ्रामक विज्ञापनों से बचाने के लिए कानूनी कार्रवाई आवश्यक है। इस मामले ने स्पष्ट कर दिया है कि सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट वाले उत्पादों में विज्ञापन की सटीकता और तथ्यात्मक जानकारी सुनिश्चित करना आवश्यक है। इस घटना ने विज्ञापन उद्योग में एक चेतावनी भेजी है कि उपभोक्ता कानून के तहत भ्रामक विज्ञापन की कोई भी गतिविधि गंभीर रूप से ली जाएगी।
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