एक ऐसा गांव, जहां 182 वर्षों से जारी है रामलीला का सांस्कृतिक सफर

विवेक त्रिपाठी
कुशीनगर (आईएएनएस)| देश की राजधानी दिल्ली से लेकर अयोध्या और देश के कोने- कोने में रामलीलाओं का मंचन हो रहा है। इनमें बड़े किरदार आते हैं। चर्चा होती है, लेकिन एक गांव ऐसा भी है जो तमाम ताम-झाम से दूर 182 साल से लगातार रामलीला का मंचन कर रहा है। इसके पात्र और दर्शक ग्रमीण ही होते हैं। इस गांव ने न केवल रामलीला की सांस्कृतिक मशाल को जलाए रखा है, बल्कि देश-विदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाली अनेक प्रतिभाएं भी दी हैं।
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