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SIR पूरा कर चुके 20 राज्यों में चलेगा विशेष अभियान, छूटे मतदाताओं और नए वोटरों के नाम जोड़े जाएंगे

jantaserishta.com
2 Oct 2026 2:58 PM IST
SIR पूरा कर चुके 20 राज्यों में चलेगा विशेष अभियान, छूटे मतदाताओं और नए वोटरों के नाम जोड़े जाएंगे
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नई दिल्ली: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR पूरा कर चुके 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चुनाव आयोग अब विशेष अभियान चलाने जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे लोगों को मतदाता सूची में शामिल करना है, जिनका नाम SIR के दौरान छूट गया है। इसके साथ ही 18 साल की उम्र पूरी कर चुके नए मतदाताओं को भी मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। चुनाव आयोग ने 29 सितंबर को राज्यों को लिखित निर्देश भेजे थे। गुरुवार को सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस में भी इस निर्देश को दोहराया गया।
SIR पूरा होने के बाद छूटे लोगों के लिए विशेष अभियान
चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और ERO मिलकर विशेष अभियान चलाएंगे।
इस अभियान में दो तरह के मतदाताओं पर विशेष ध्यान रहेगा। पहला, वे लोग जिनका नाम SIR के दौरान मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाया। दूसरा, वे युवा जो अब 18 साल की उम्र पूरी कर चुके हैं और पहली बार मतदाता बनने के योग्य हैं।
इन लोगों को लगातार चलने वाली मतदाता सूची अपडेट प्रक्रिया के तहत फॉर्म-6 के जरिए नाम जुड़वाने का रास्ता दिया जाएगा। आयोग ने साफ किया है कि SIR के दौरान इस्तेमाल किया गया अतिरिक्त घोषणा वाला हिस्सा सामान्य प्रक्रिया में लागू नहीं रहेगा।
पुरानी और नई वोटर लिस्ट का मिलान होगा
चुनाव आयोग ने SIR से पहले और उसके बाद तैयार हुई मतदाता सूचियों की तुलना करने का भी निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य ऐसे पात्र लोगों की पहचान करना है, जिनका नाम किसी वजह से नई सूची में नहीं रह गया।
ऐसे मामलों में बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO घर जाकर जानकारी और दस्तावेजों की जांच कर सकते हैं। अगर जांच में व्यक्ति डुप्लीकेट या मृत मतदाता नहीं पाया जाता है, तो फॉर्म-6 के जरिए उसका नाम फिर से मतदाता सूची में शामिल किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में राजनीतिक दलों और बूथ लेवल एजेंटों से भी सहयोग लेने की बात कही गई है।
ECINET की भी होगी समीक्षा
चुनाव आयोग ने ECINET की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाने का फैसला किया है। इसमें IIT या IIIT से जुड़े एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल किए जाने की बात कही गई है। जरूरत के अनुसार ECINET और संबंधित सॉफ्टवेयर में बदलाव किए जाएंगे। आयोग ने कहा है कि भविष्य में IT से जुड़े नए मॉड्यूल और पोर्टल में बदलावों को तय प्रक्रिया के तहत देखा जाएगा।
इसी बीच SIR से जुड़े फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट भी सामने आई है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान फॉर्म-6 में अतिरिक्त जानकारी जोड़ने और SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई थी। यह रिपोर्टिंग का दावा है; चुनाव आयोग ने बाद में इस मामले में अपनी अलग स्थिति भी स्पष्ट की।
महाराष्ट्र में नाम हटाने को लेकर विशेष सावधानी
महाराष्ट्र में अभी SIR की प्रक्रिया चल रही है। यहां चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि किसी पात्र मतदाता का नाम जल्दबाजी में मतदाता सूची से बाहर न किया जाए। मुंबई शहर और मुंबई उपनगर के अधिकारियों से कहा गया है कि किसी नाम को हटाने से पहले संबंधित व्यक्ति को जरूरी दस्तावेज देने का पर्याप्त अवसर दिया जाए। जरूरत होने पर सुनवाई भी की जाए और उसके बाद ही फैसला लिया जाए।
महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में करीब 1.22 करोड़ रिकॉर्ड जांच के लिए चिन्हित किए गए हैं। इनमें करीब 62.48 लाख मामले रिश्तेदारों की जानकारी में गड़बड़ी से जुड़े हैं, जबकि करीब 59.75 लाख मामलों में पिछली मतदाता सूची में किसी रिश्तेदार से मैपिंग नहीं हो पाई।
नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए 3, 4, 10 और 11 अक्टूबर को विशेष कैंप लगाए जाने की जानकारी भी दी गई है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से बाहर न रह जाए और उसके मतदान के अधिकार में बाधा न आए।
SIR की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही है। पहले और दूसरे चरण में कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि तीसरे चरण में 16 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।
चुनाव आयोग के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार तीसरे चरण में महाराष्ट्र, दिल्ली, झारखंड, कर्नाटक, मेघालय और अन्य क्षेत्र शामिल हैं। इस चरण की अलग-अलग प्रक्रियाओं के लिए आयोग ने तारीखें तय की हैं।
अब SIR पूरा कर चुके 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू होने वाला विशेष अभियान उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण होगा, जिनका नाम किसी कारण से सूची में नहीं रह पाया या जो पहली बार मतदाता बनने के योग्य हुए हैं। चुनाव आयोग की ओर से संबंधित अधिकारियों को ऐसे मतदाताओं को सूची में शामिल करने की प्रक्रिया आसान बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
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