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उत्तराखंड में 5 फरवरी को UCC पर एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया जाएगा

27 Jan 2024 9:29 AM IST
उत्तराखंड में 5 फरवरी को UCC पर एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया जाएगा
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देहरादून: UCC पर उत्तराखंड की धामी सरकार अपने इरादे स्पष्ट रूप से बहुत बार बता चुकी है। पिछले महीने उत्तराखंड विधानसभा के संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने भी उत्तराखंड विधानसभा में UCC पर विशेष सत्र बुलाए जाने की बात कही थी। प्रेमचंद अग्रवाल द्वारा दिए इस बयान की पुष्टि भी होती नज़र आ रही है, …

देहरादून: UCC पर उत्तराखंड की धामी सरकार अपने इरादे स्पष्ट रूप से बहुत बार बता चुकी है। पिछले महीने उत्तराखंड विधानसभा के संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने भी उत्तराखंड विधानसभा में UCC पर विशेष सत्र बुलाए जाने की बात कही थी। प्रेमचंद अग्रवाल द्वारा दिए इस बयान की पुष्टि भी होती नज़र आ रही है, बताया जा रहा है कि विधानसभा में 5 फरवरी को UCC पर एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया जाएगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा UCC के लिए गठित विशेषज्ञों की समिति का कार्यकाल 26 जनवरी 2024 को समाप्त हो चूका था। जिसे धामी सरकार ने 15 दिन का विस्तार देते हुए समिति को अपनी अंतिम रिपोर्ट शीघ्र जमा करने के आदेश भी दिए हैं।

मई 2022 में सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अगुआई में पांच सदस्यीय समिति गठित की गई थी। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार यह पांच सदस्यीय समिति दो या तीन फरवरी को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है।

26 जनवरी को समाप्त हुए इस समिति के कार्यकाल को मुख्यमंत्री धामी द्वारा विस्तार दिया जाना इस बात के सीधे संकेत हैं कि विधानसभा में UCC पर बुलाए गए विशेष सत्र में विधेयक पर चर्चा कर उसे पारित किया जाएगा। इस विस्तारित सत्र की कार्यवाही पांच फरवरी को सुबह 11 बजे से प्रारंभ होगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह विधेयक पूर्ण रूप से समिति विशेषज्ञों की रिपोर्ट पर आधारित होगा जो विधानसभा से पारित होते ही पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

लोकसभा चुनाव से पहले पूरे देश की आशाओं को बढ़ा रहा मुख्यमंत्री धामी का यह निर्णय प्रदेश में लागू होते ही राष्ट्रीय पटल पर प्रभावशाली सिद्ध हो सकता है। देश में एक संविधान ही देश को विकसित और अनुशासित बना सकता है। मुख्यमंत्री धामी का यह निर्णय आजादी के 77 वर्ष बाद भी भारतीय संविधान को सशक्त करने के लिए हो रहे प्रयासों के बीच एक बुलंद पहल है। भारत के हर जागरूक और जिम्मेदार नागरिक की एक ही राय है एक देश में एक ही संविधान स्वीकार्य है।

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