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पूर्णिया। बिहार के पूर्णिया जिले से अपहरण का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक युवक ने कथित तौर पर पैसों की जरूरत पूरी करने के लिए खुद के अपहरण की झूठी कहानी रच डाली। युवक के अपहरण और एक लाख रुपए की फिरौती मांगे जाने की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस रातभर युवक की तलाश करती रही, लेकिन जब उसे सकुशल बरामद किया गया तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ गई। मामला पूर्णिया जिले के अमौर थाना क्षेत्र के बागढर गांव के वार्ड नंबर 11 का है। यहां रहने वाले अब्दुल करीम ने पुलिस को सूचना दी थी कि उनका करीब 26 वर्षीय बेटा सबा जफर घर से लापता हो गया है। इसी दौरान उसके अपहरण और रिहाई के बदले एक लाख रुपए की फिरौती मांगे जाने की बात सामने आई। सूचना मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और युवक की तलाश शुरू कर दी।
रातभर युवक को तलाशती रही पुलिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए बायसी एसडीपीओ जितेंद्र पांडे के नेतृत्व में विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया। पुलिस ने युवक की तलाश में टोल प्लाजा से लेकर रेलवे स्टेशनों तक लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके साथ ही डीआईयू की मदद से तकनीकी जांच भी की गई। पुलिस टीम ने विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की और वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर युवक की तलाश जारी रखी। रातभर की मशक्कत के बाद पुलिस ने सबा जफर को जलालगढ़ से सकुशल बरामद कर लिया।
बरामदगी के बाद सामने आया चौंकाने वाला सच
पुलिस के मुताबिक, युवक का वास्तव में अपहरण हुआ ही नहीं था। पूछताछ में सामने आया कि सबा जफर आर्थिक तंगी से परेशान था और उसे पैसों की जरूरत थी। इसी वजह से उसने कथित तौर पर अपने परिवार से एक लाख रुपए हासिल करने के लिए खुद के अपहरण की झूठी कहानी बनाई थी। जिस युवक को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छुड़ाने के लिए पुलिस रातभर परेशान रही, उसी पर अपहरण की साजिश रचने का आरोप सामने आया।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
बायसी एसडीपीओ जितेंद्र पांडे ने बताया कि परिजनों से सूचना मिलने के बाद वरीय पुलिस अधीक्षक के दिशा-निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई थी। तकनीकी जांच और छापेमारी के बाद युवक को जलालगढ़ से बरामद किया गया। पूछताछ में उसने आर्थिक तंगी के कारण साजिश रचने की बात बताई। पुलिस ने अमौर थाना कांड संख्या 457/26 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही लोगों से अपील की है कि झूठी या भ्रामक सूचना देकर पुलिस का समय और संसाधन बर्बाद न करें, क्योंकि इससे वास्तविक आपातकालीन मामलों में कार्रवाई प्रभावित हो सकती है।
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