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अदालत का फैसलाnnnnnnnnnnnnnnn
Delhi दिल्ली। महज 500 रुपये की एक घड़ी को लेकर शुरू हुआ पड़ोसियों का विवाद एक व्यक्ति की मौत का कारण बन गया और यह मामला करीब 29 वर्षों तक अदालतों में चलता रहा। अब Supreme Court of India ने इस पुराने आपराधिक मामले में फैसला सुनाते हुए जीवित बचे दोषी को राहत दी है। अदालत ने दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए उसकी पांच साल की सजा को पहले से काटी गई अवधि तक सीमित कर दिया।
मामला वर्ष 1997 का है। जानकारी के अनुसार, पदम सिंह ने अपने पड़ोसी मनुआ को 500 रुपये में एक घड़ी बेची थी। बाद में मनुआ घड़ी वापस करना चाहता था, जिसे लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। कहासुनी जल्द ही मारपीट में बदल गई। इसी दौरान रामू और माथू भी मनुआ के पक्ष में आ गए। आरोप है कि तीनों ने पदम सिंह के साथ मारपीट की, जिससे वह एक सूखी नहर में गिर गए। गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
देहरादून की ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2002 में तीनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के तहत दोषी ठहराते हुए पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। वर्ष 2012 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति Ujjal Bhuyan और Arun Palli की पीठ ने कहा कि घटना अचानक हुए विवाद का परिणाम थी। अदालत ने माना कि मृतक को लगी गंभीर चोटें सूखी और पथरीली नहर में गिरने से भी हो सकती थीं। साथ ही, दोषी माथू की उम्र अब 60 वर्ष से अधिक हो चुकी है और वह करीब डेढ़ साल जेल में भी रह चुका है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने सजा में राहत दी।
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