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बालाघाट में कुपोषण की भयावह तस्वीर, जांच में 27 हजार से ज्यादा बच्चे कुपोषित

SHIDDHANT
25 Sept 2026 10:11 PM IST
बालाघाट में कुपोषण की भयावह तस्वीर, जांच में 27 हजार से ज्यादा बच्चे कुपोषित
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पोषण व्यवस्था सवाल
Balaghat. बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी अंचल में बच्चों की मौत के मामलों के बीच कुपोषण के आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 1 लाख 21 हजार 892 बच्चों की जांच की गई, जिनमें 27 हजार 839 बच्चे कुपोषित पाए गए। इनमें 3,741 बच्चों को अति कुपोषित श्रेणी में रखा गया है। इस हिसाब से जांचे गए बच्चों में करीब 22.8 प्रतिशत कुपोषित पाए गए।
बैगा बहुल इलाकों में कुपोषण के साथ मलेरिया, खसरा और दूसरी बीमारियों को भी बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बताया जा रहा है। हाल के दिनों में इन क्षेत्रों में 32 से अधिक बच्चों की मौत की बात सामने आई है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने कई मामलों में मलेरिया सहित दूसरी बीमारियों को कारण बताया है, जबकि कुपोषण और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी चिंता का विषय माना जा रहा है। बोंदारी गांव में तीन वर्षीय प्रीति धुर्वे की मौत ने स्थिति की गंभीरता को और उजागर किया है। अधिकारियों के मुताबिक बच्ची कुपोषित थी और उसका वजन करीब साढ़े चार किलोग्राम था।
बैहर विधानसभा क्षेत्र में 1,111 बच्चे अति कुपोषित पाए गए हैं। इनमें बैहर ब्लॉक के 560 और बिरसा ब्लॉक के 551 बच्चे शामिल हैं। क्षेत्रीय विधायक संजय उइके ने भी अलग आंकड़े जारी करते हुए बच्चों में कम लंबाई, कम वजन और लंबाई के अनुपात में कम वजन की समस्या का मुद्दा उठाया है। कुपोषण के बीच टेक होम राशन और पोषण ट्रैकर के आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। विधायक ने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए टीएचआर की उपलब्धता और गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं कुछ आंगनवाड़ी केंद्रों में सरकारी अवकाश के दिनों में भी 100 प्रतिशत उपस्थिति और भोजन वितरण दर्ज होने के दावों ने निगरानी व्यवस्था पर सवाल बढ़ाए हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग का कहना है कि कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें भोजन और नाश्ता उपलब्ध कराया जा रहा है। परिवारों को पौष्टिक आहार के प्रति जागरूक करने के साथ जरूरत पड़ने पर बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जाता है। बच्चों की मौत के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर स्वास्थ्य और पोषण की निगरानी कर रही हैं। सामने आए आंकड़ों के बाद बैगा अंचल में पोषण योजनाओं के क्रियान्वयन और उनकी जमीनी निगरानी पर सवाल बने हुए हैं।
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