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SHO अजय शर्मा का विवादित वीडियो वायरल, मोबाइल से युवक की ‘नागरिकता’ बताने का दावा
Shantanu Roy
1 Jan 2026 8:32 PM IST

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देखें VIDEO...
Ghaziabad. गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें थाना प्रभारी अजय शर्मा मोबाइल फोन के माध्यम से एक युवक की नागरिकता निर्धारित करने का दावा करते दिखे। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि SHO ने युवक की पीठ पर मोबाइल लगाकर दावा किया कि वह बांग्लादेशी नागरिक है, जबकि युवक खुद को बिहार के अररिया जिले का निवासी बता रहा था। वीडियो सामने आते ही SHO अजय शर्मा की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे। कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस घटना को न्यायिक और पुलिस कार्यशैली के दृष्टिकोण से चिंताजनक बताया। लोगों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति की नागरिकता या राष्ट्रीयता का निर्धारण बिना किसी कानूनी प्रक्रिया और दस्तावेज़ के मोबाइल या व्यक्तिगत अनुमान से करना न केवल अनुचित है बल्कि कानून के खिलाफ भी हो सकता है।
गाजियाबाद के SHO को सुनें। इन्होंने नए साल में मशीन का ईजाद किया है जिसे सटा देने से लोगों की नागरिकता का पता चल जाता है । सरकार को तुरंत इस अविष्कार को सम्मानित करना चाहिए । बहुत दिनों बाद भारत ने कुछ बड़ा मौलिक अविष्कार किया ह।
— Narendra Nath Mishra (@iamnarendranath) January 1, 2026
pic.twitter.com/lVvYIaJznq
घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया। बताया जा रहा है कि वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है और SHO अजय शर्मा की इस कथित कार्रवाई के संबंध में अधिकारिक प्रतिक्रिया ली जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है और पुलिस को हमेशा कानूनी प्रक्रिया और दस्तावेज़ों के आधार पर ही कार्रवाई करनी चाहिए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के साथ-साथ लोग इस घटना को लेकर कड़े शब्दों में आलोचना कर रहे हैं। कई यूज़र्स ने ट्वीट और पोस्ट में कहा कि पुलिस के अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करके आम नागरिकों की छवि को नुकसान पहुँचा सकते हैं। कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ऐसा करने से SHO का उद्देश्य केवल युवकों को डराना था या उनके पास किसी भी कानूनी आधार के बिना ऐसा करने का अधिकार है।
घटना के प्रकाश में आने के बाद स्थानीय नागरिक और मीडिया प्रतिनिधि भी गाजियाबाद पुलिस प्रशासन से स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कानूनी प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों का पालन करना हर पुलिस अधिकारी की जिम्मेदारी है, और बिना प्रमाण के किसी की राष्ट्रीयता तय करना उचित नहीं है। इस घटना ने यूपी पुलिस की कार्यशैली पर सार्वजनिक बहस को बढ़ावा दिया है। लोगों ने मांग की है कि ऐसी घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए और यदि SHO द्वारा नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। साथ ही यह घटना नागरिकों को यह संदेश भी देती है कि किसी भी स्थिति में सुरक्षा बल और कानून का दुरुपयोग स्वीकार्य नहीं है। पुलिस विभाग ने फिलहाल वीडियो की पड़ताल शुरू कर दी है और अधिकारियों का कहना है कि सभी संबंधित पक्षों से पूछताछ की जाएगी। इस घटना के परिणामस्वरूप गाजियाबाद पुलिस प्रशासन अपने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (SOP) की समीक्षा करने पर विचार कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसे विवादों से बचा जा सके।
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